
Neha Mishra Success Story: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले की रहने वाली नेहा मिश्रा की सफलता की कहानी आज हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है। नेहा का सपना हमेशा बड़ा था, लेकिन उससे भी बड़ा था उनका जज्बा। उन्होंने सिर्फ एक नहीं, बल्कि दो-दो सरकारी नौकरियां मिलने के बाद भी रुकने का नाम नहीं लिया और आखिरकार अपने सपनों की कुर्सी-एसडीएम-हासिल कर ली।
पिता का था सपना
नेहा मिश्रा के पिता चाहते थे कि उनकी बेटी अफसर बने। इसी वजह से नेहा ने बचपन से ही पढ़ाई को लेकर गंभीरता दिखाई। वह हमेशा अपनी कक्षा में टॉपर रहीं। उनकी शुरुआती पढ़ाई कुशीनगर में ही हुई। पढ़ाई के प्रति लगन और अनुशासन ने उन्हें शुरू से ही अलग पहचान दिलाई। उच्च शिक्षा के लिए नेहा लखनऊ चली गईं। उन्होंने आईटी कॉलेज, लखनऊ से ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की। कॉलेज के दिनों से ही उनका लक्ष्य साफ था, सिविल सर्विस में जाना। इसके बाद उन्होंने पूरी लगन के साथ UPPSC परीक्षा की तैयारी शुरू की।
नेहा की पहली कोशिश
नेहा का पहला प्रयास साल 2017 में था। इस प्रयास में उन्हें बड़ी सफलता मिली और उनका चयन नायब तहसीलदार के पद पर हो गया। यह किसी भी युवा के लिए बड़ी उपलब्धि होती है, लेकिन नेहा का सपना यहीं तक सीमित नहीं था। उनका लक्ष्य एसडीएम बनना था, इसलिए उन्होंने इस पद पर संतोष नहीं किया और आगे की तैयारी जारी रखी।
नेहा ने नहीं मानी हार
दूसरे प्रयास में साल 2018 में नेहा ने फिर UPPSC परीक्षा दी। इस बार उनका चयन ट्रेजरी ऑफिसर के पद पर हुआ। लगातार दूसरी सरकारी नौकरी मिलने के बावजूद नेहा ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपने लक्ष्य को सामने रखते हुए फिर से तैयारी शुरू कर दी। आखिरकार तीसरे प्रयास में नेहा ने इतिहास रच दिया। UPPSC-2020 परीक्षा में उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए रैंक-10 हासिल की और एसडीएम के पद पर चयनित हो गईं। यह सफलता इस बात का सबूत है कि सच्चे सपनों के लिए इंसान को कभी रुकना नहीं चाहिए।
युवाओं को दे रही संदेश
नेहा मिश्रा की ये कहानी साहस, त्याग और कड़ी मेहनत की मिसाल है। उनकी सफलता बताती है कि अगर लक्ष्य साफ हो और इरादे मजबूत हों, तो कोई भी सपना पूरा किया जा सकता है। आज नेहा हजारों युवाओं को यह संदेश दे रही हैं कि असली जीत वहीं होती है, जहां इंसान अपने सपनों से समझौता नहीं करता।
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