
नई दिल्ली: बीते एक साल से चल रहे रूस और यूक्रेन युद्ध ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। जहां एक तरफ युद्ध में रूस अपनी विशालकाय ड्रोन और मिसाइलों का इस्तेमाल करके यूक्रेन में तबाही मचा रहा है। वहीं दूसरी तरफ यूक्रेन की सेना भीम ईट का जवाब पत्थर से दे रही है। ऐसे में अब यूक्रेन की मदद के लिए पश्चिमी देशों ने जर्मनी पर लेपर्ड-2टैंक देने का दबाव बनाया है। अगर यूक्रेन को लेपोटू टैंक मिल जाता है तो यह रूस के लिए बहुत बड़ी आफत बन सकती है। इसके साथ ही शुक्रवार को 50देशों ने कीवी कोरू सेना का मुकाबला करने के लिए बख्तरबंद वाहनों और गोला बारूद से सहायता की है।
जानकारी के मुताबिक सैन्य हथियार विशेषज्ञों का कहना है कि यूक्रेन के द्वारा बनाया गया लेपर्ड 2टैंक युद्ध के लिए एक दमदार हथियार साबित हो सकता है। अमेरिकी निर्मित M1अब्राम टैंक के बाद यह दूसरे नंबर पर आता है। शीत युद्ध के दौरान सोवियत खतरों के जवाब में लेपर्ड 2मूल रूप से 1970के दशक में पश्चिम जर्मन सेना के लिए डिजाइन किया गया था। टैंक बनाने वाली जर्मन रक्षा कंपनी क्रॉस-मफेई वेगमैन के अनुसार, प्रत्येक टैंक में 44- या 55-कैलिबर 120-मिमी मुख्य बंदूक और 1,500-अश्वशक्ति इंजन होता है जो 44 मील प्रति घंटे की रफ्तार से चलता है।
वहीं यूक्रेनी अधिकारियों के अनुसार, इस तरह के टैंक यूक्रेनी जीत की कुंजी हो सकती है। अमेरिका ने गुरुवार को यूक्रेन के लिए हथियारों और गोला-बारूद के 2.5 अरब डॉलर के एक और बड़े पैकेज की घोषणा की है। यूक्रेन के समर्थक पश्चिमी देशों ने कीव की बख्तरबंद फोर्स को मजबूत करने की मांग को देखते हुए उसे बड़ी संख्या में बख्तरबंद गाड़ियां देने का फैसला किया है।
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