आज का इतिहास: भारत के मशहूर चित्रकार दुनिया को कह गए थे अलविदा, तूफान के चलते 1,600 लोगों ने गंवाई थी अपनी जान

आज का इतिहास:  भारत के मशहूर चित्रकार दुनिया को कह गए थे अलविदा, तूफान के चलते 1,600 लोगों ने गंवाई थी अपनी जान

नई दिल्ली:  आज के दिन यानी नौ जून को एक महशूश चित्रकला दुनिया को अलविदा कह गए थे। बता दें कि भारत में आधुनिक चित्रकला के पर्याय एम.एफ. हुसैन ने आज ही के दिन दुनिया को अलविदा कहा था। एम एफ हुसैन को पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर पहचान 1940 के दशक के आखिर में मिली। युवा चित्रकार के रूप में एम एफ़ हुसैन बंगाल स्कूल ऑफ़ आर्ट्स की राष्ट्रवादी परंपरा को तोड़कर कुछ नया करना चाहते थे। हुसैन बहुत छोटे थे जब उनकी मां का देहांत हो गया। इसके बाद उनके पिता इंदौर चले गए जहाँ हुसैन की प्रारंभिक शिक्षा हुई।

बीस साल की उम्र में हुसैन बम्बई गये और उन्हे जे जे स्कूल ओफ़ आर्ट्स में दाखला मिल गया। शुरुआत में वे बहुत कम पैसो में सिनेमा के होर्डिन्ग बनाते थे। कम पैसे मिलने की वजह से वे दूसरे काम भी करते थे जैसे खिलोने की फ़ैक्टरी में जहाँ उन्हे अच्छे पैसे मिलते थे। पहली बार उनकी पैन्टिन्ग दिखाये जाने के बाद उन्हे बहुत प्रसिद्धी मिली। अपनी प्रारंभिक प्रदर्शनियों के बाद वे प्रसिद्धि के सोपान चढ़ते चले गए और विश्व के अत्यंत प्रतिभावान कलाकारों में उनकी गिनती होती थी।

एमएफ़ हुसैन को पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर पहचान 1940 के दशक के आख़िर में मिली। वर्ष 1947 में वे प्रोग्रेसिव आर्टिस्ट ग्रुप में शामिल हुए। युवा पेंटर के रूप में एमएफ़ हुसैन बंगाल स्कूल ऑफ़ आर्ट्स की राष्ट्रवादी परंपरा को तोड़कर कुछ नया करना चाहते थे। वर्ष 1952 में उनकी पेंटिग्स की प्रदर्शनी ज़्यूरिख में लगी। उसके बाद तो यूरोप और अमरीका में उनकी पेंटिग्स की ज़ोर-शोर से चर्चा शुरू हो गई। वर्ष 1966में भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया। वर्ष 1967 में उन्होंने अपनी पहली फ़िल्म थ्रू द आइज़ ऑफ़ अ पेंटर बनाई। ये फ़िल्म बर्लिन फ़िल्म समारोह में दिखाई गई और फ़िल्म ने गोल्डन बेयर पुरस्कार जीता।

वर्ष 1971 में साओ पावलो समारोह में उन्हें पाबलो पिकासो के साथ विशेष निमंत्रण देकर बुलाया गया था। 1973 में उन्हें पद्मभूषण से सम्मानित किया गया तो वर्ष 1986 में उन्हें राज्यसभा में मनोनीत किया गया। भारत सरकार ने वर्ष 1991 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। 92 वर्ष की उम्र में उन्हें केरल सरकार ने राजा रवि वर्मा पुरस्कार दिया। क्रिस्टीज़ ऑक्शन में उनकी एक पेंटिंग 20 लाख अमरीकी डॉलर में बिकी। इसके साथ ही वे भारत के सबसे महंगे पेंटर बन गए थे। उनकी आत्मकथा पर एक फ़िल्म भी बन रही है।

देश-दुनिया की अन्य प्रमुख घटनाएं:-

1720: स्वीडन और डेनमार्क ने तीसरी स्टॉकहोम संधि पर हस्ताक्षर किए।

1752: फ्रांसीसी सेना ने त्रिचिनोपोली में ब्रिटेन के समक्ष आत्मसमर्पण किया।

1789: स्पेन ने वैंकूवर द्वीप के निकट ब्रिटिश जहाजों पर कब्जा किया।

1900: स्वतंत्रता सेनानी बिरसा मुंडा का रांची जेल में संदिग्ध परिस्थितियों में निधन।

1940: नार्वे ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जर्मनी के सामने आत्मसमर्पण किया।

1956: अफगानिस्तान में जबरदस्त भूकंप से 400 लोगों की मौत।

1960: चीन में तूफान से 1,600 लोगों की मौत।

1964 : जवाहरलाल नेहरू के निधन के बाद लालबहादुर शास्त्री ने देश के प्रधानमंत्री का पद संभाला।

1970 : जॉर्डन के शाह हुसैन के वाहन पर गोलियां चलाई गईं। शाह हुसैन तो बच गए, लेकिन उनका वाहन चालक इस हमले में घायल हुआ।

1980: अंतरिक्ष यान सोयूज टी-2 पृथ्वी पर लौटा।

1983: मार्गरेट थैचर के नेतृत्व में ब्रिटेन के आम चुनाव में कंजर्वेटिव पार्टी ने लगातार दूसरी बार बहुमत हासिल किया।

2011: भारत के मशहूर चित्रकार एम एफ हुसैन का लंदन में निधन।

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