सेना के लिए सरकार ने खोल दिए खजाने, आधुनिक सिस्टम से लैस पनडुब्बी-मिसाइल खरीद की मंजूरी

सेना के लिए सरकार ने खोल दिए खजाने, आधुनिक सिस्टम से लैस पनडुब्बी-मिसाइल खरीद की मंजूरी

Defence Deal For Army: ऑपरेशन सिंदूर के बाद देश की सेनाओं के आधुनिकीकरण का काम तेज हो गया है। इसके लिए भारत सरकार करीब तीन लाख करोड़ रुपये से अधिक के प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर दिया है।  इसमें फाइटर जेट्स से लेकर पनडुब्बी और आधुनिक मिसाइल सिस्टम शामिल हैं।  कुछ दिन पहले ही रक्षा मंत्रालय ने एक लाख करोड़ रुपये से अधिक के खरीद प्रस्तावों को हरी झंडी दे दी थी। इसमें 44 हजार करोड़ रुपये के लागत से 12 माइन काउंटर मेजर्स वेसेल्स में खरीदे जाएंगे।

इसके साथ ही सरकार 36हजार करोड़ रुपये की लागत से क्विक रिएक्शन सरफेस टू एयर मिसाइल खरीदेगी। वहीं, 36 हजार करोड़ रुपये की लागत से QRSAM के छह रेजिमेंट तैयार किए जाएंगे। जिसमें तीन-तीन रेजिमेंट एयरफोर्स और थल सेना के लिए होंगे।

क्या है QRSAM सिस्टम

QRSAM एक एयर डिफेंस सिस्टम हैं। इसे बेबी एस-400 के नाम से भी जाना जाता है।  भारत ने रूस से एस-400एयर डिफेंस सिस्टम के पांच रेजिमेंट की खरीदे हैं। जिसमें से तीन की तैनाती कर दी गई है। अगले साल तक बाकी के दो रेजिमेंट्स भारतीय सेना को मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। ऑपरेशन सिंदूर में एस-400 और देसी आकाश एयर डिफेंस सिस्टम ने ताकत दिखाई  लेकिन, पूरे भारत को एक किले में तब्दील करने के लिए ये दोनों डिफेंस सिस्टम अभी पर्याप्त नहीं हैं। क्योंकि, दुनिया खासकर भारत के पड़ोस में चीजें तेजी से बदल रही है। ऐसे में भारत को एक अभेद्य किला बनाने के लिए QRSAM जैसे सिस्टम की जरूरत है। ये QRSAM डिफेंस सिस्टम फाइटर जेट्स और मिसाइलों के साथ ड्रोन से होने वाले हमलों को प्रभावी तरीके से रोकन में कारगर है।

66 हजार करोड़ रुपए खर्च होने की उम्मीद

सेना को मजबूती प्रदान करने के लिए रक्षा मंत्रालय ने एक झटके में 36 हजार करोड़ रुपये के खर्च से इसके छह रेजिमेंट तैयार करने को मंजूरी दी है। लेकिन, खास बात यह है कि अपने देश के विशाल क्षेत्र को देखते हुए ये छह रेजिमेंट्स पर्याप्त नहीं हैं। भारतीय सेना ने ऐसे 11 रेजिमेंट्स की डिमांड की थी। लेकिन उसे अभी केवल तीन रेजिमेंट्स दिए जा रहे हैं। इस एक रेजिमेंट की कीमत करीब छह हजार करोड़ रुपये बताया जा रहा है। ऐसे में अगर भारतीय सेना को उसकी डिमांड के अनुरूप 11 रेजिमेंट्स दिए जाते हैं तो इस पर करीब 66 हजार करोड़ रुपये खर्च होने की उम्मीद है।

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