MANOJ PANDEY: इंजीनियर से लेकर आर्मी चीफ बनने के सफर में क्या रही चुनौतियां

MANOJ PANDEY: इंजीनियर से लेकर आर्मी चीफ बनने के सफर में क्या रही चुनौतियां

नई दिल्ली: लेफ्टिनेंट जनरल मनोज पांडे देश के नए सेना प्रमुख होंगे। नागपुर से आने वाले मनोज पांडे देश के पहले ऐसे आर्मी चीफ हैं, जो इंजीनियरिंग कोर से आते हैं। 30 अप्रैल को रिटायर हो रहे वर्तमान आर्मी चीफ जनरल एमएम नरवणे की जगह पदभार ग्रहण करेंगे। लेफ्टिनेंट जनरल मनोज को आर्मी चीफ बनाए जाने के ऐलान के बाद से उनके नागपुर स्थित घर पर जश्न का माहौल हैं।

लेफ्टिनेंट जनरल मनोज पांडे के पिता डॉ. सीजी पांडे एक नामचीन मनोचिकित्सक थे और कई साल तक नागपुर विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग में हेड के रूप में कार्यरत रहे। उनकी माता प्रेमा पांडे ऑल इंडिया रेडियो में अनाउंसर थीं। लेफ्टिनेंट जनरल की माता जी अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनके द्वारा पेश किया जाने वाले 'बेला के फूल' कार्यक्रम आज भी नागपुर के लोग याद करते हैं। थलसेना के 29वें प्रमुख नियुक्त हुए मनोज पांडे महाराष्ट्र के नागपुर से ताल्लुक रखते हैं। उनका बेटा अक्षय वायुसेना में अधिकारी है, जबकि उनके एक भाई संकेत पांडे सेना से कर्नल पद से सेवानिवृत्त हुए हैं।

मनोज पांडे ऑर्मी चीफ बनने वाले देश पहले इंजीनियर हैं। अब तक आर्मी में इन्फैंट्री, आर्मर्ड और आर्टिलरी अधिकारी ही आर्मी चीफ बनते रहे हैं। लेफ्टिनेंट जनरल पांडे 1 फरवरी 2022 को उप सेना प्रमुख बने थे। लेफ्टिनेंट जनरल मनोज पांडे चीन से सटे सिक्किम और लद्दाख बॉर्डर पर कई ऑपरेशन का नेतृत्व कर चुके हैं। नेशनल डिफेंस एकेडमी के 1982 बैच से पासआउट मनोज पांडे इंजीनियरिंग बैकग्राउंड से आने वाले पहले आर्मी चीफ हैं। पांडे ने जम्मू-कश्मीर के LOC पल्लनवाला में चलने वाले ऑपरेशन पराक्रम को लीड किया है। यह ऑपरेशन जम्मू-कश्मीर में 2001 में संसद हमले के बाद चलाया गया था, जिसमें आतंकियों के हथियार सप्लाई के नेक्सस का खुलासा किया गया था। इस ऑपरेशन में बड़ी संख्या में आतंकी मारे गए थे।

लेफ्टिनेंट जनरल मनोज पांडे चीन से सटे ईस्टर्न कमांड में कमांडर और ब्रिगेडियर स्टाफ के पद पर काम कर चुके हैं। वे लद्दाख इलाके के माउंटेन डि‌विजन में इंजीनियर ब्रिगेड के पद पर तैनात रह चुके हैं। वहीं नॉर्थ-ईस्ट रीजन में भी लेफ्टिनेंट जनरल रहते कई ऑपरेशन में भाग ले चुके हैं। इसके अलावा, वे अंडमान-निकोबार में बतौर कमांडर भी काम कर चुके हैं। पांडेय परम विशिष्ट मेडल से सम्मानित हो चुके हैं।

लेफ्टिनेंट जनरल मनोज पांडे ऐसे समय देश के सेना प्रमुख की जिम्मेदारी संभालेंगे जब बीते दो साल से पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ सीमा पर चल रही सैन्य जटिलताएं अभी भी बनी हुई हैं। अफगानिस्तान में तालिबान के आने के बाद जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के नए खतरों की आशंकाएं कायम हैं तो मौजूदा रूस-यूक्रेन युद्ध के प्ररिप्रेक्ष्य में नई तरह की सामरिक चुनौतियों से रूबरू होना पड़ेगा। इनके बीच सेना का आधुनिकीकरण और जरूरी अस्त्र-शस्त्रों की यथाशीघ्र आपूर्ति नए सेना प्रमुख के लिए सबसे अहम होगी।

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