घंटों तक बिना छत के उड़ता रहा विमान... 35 साल पहले पायलट की इस सूझबूझ ने बचाई थी 95 लोगों की जान

घंटों तक बिना छत के उड़ता रहा विमान... 35 साल पहले पायलट की इस सूझबूझ ने बचाई थी 95 लोगों की जान

देश-विदेश से विमान की इमरजैंसी लैंडिग के बारे में तो आप लोगों ने कई बात सुना होकर जिसमें ज्यादा तक विमान ठीक से लैंडिग कर लेते है और सभी यात्री सुरक्षित होते है। लेकिन कई बार आप लोगों ने विमान क्रैश की भी खबरें सुनी होंगी। कई लोगों की मौत भी हो जाती है और इस हादसे के बाद भी कोई शख्स बचता है तो उसे किस्मत का खेल कहकर छोड़ दिया जाता है। लेकिन आज हम आपको एक ऐसे किस्से के बारे में बताने जा रहे है जो 35 साल पुराना है। जिससे सुनकर हर किसी के हौश उड़ जाएंगे।

35 साल पुराना हादसा

दरअसल हम बात कर रहे है 35 साल पहले हुए एक विमान हादसे की जिसमें पायलट समेत 95 लोग सवार थे जिसमें एक शख्स की मौत हो गई थी और सभी यात्री को सुरक्षित बचा लिया गया था। अब ये हादसा क्या था कैसे हुआ चलिए आपको बताते है। साल 1988 के 28 अप्रैल को हिलो इंटरनेशनल एयरपोर्ट से एक फ्लाइट उड़ान भरती है। इस फ्लाइट का नंबर 243 था। ये एक बोइंग 737-200 सीरीज का विमान था, जिसे होनोलुलु पहुचना था। इस फ्लाइट के कैप्टन 44 वर्षीय रॉबर्ट स्कॉर्न्सथाइमर और फर्स्ट ऑफिसर, 36 वर्षीय मिमी टॉम्पकिन्स और 58 वर्षीय फ्लाइट अटेंडेंट, क्लाराबेल लांसिंग थे। लांसिंग 38 साल से ये काम कर रही थीं।

24 हजार फीट की ऊंचाई पर पहुंचकर विमान की उड़ी छत

वहीं उड़ान भरने के छोड़ी ही देर में विमान 24 हजार फ़ीट की ऊंचाई पर पहुंच गया। तभी अचानक सबको एक जोर का झटका लगता है। जब तक यात्री संभलते, तब तक प्लेन की बॉडी, जिसे फ्यूसलेज कहा जाता है, उसका एक हिस्सा टूटकर हवा में उड़ चुका था।  प्लेन की छत ही गायब हो चुकी थी। ऐसे में लोग बाहर की ओर खिंचने लगे। हालांकि सभी ने सीट बेल्ट बांधी हुई थी।

सलामत थे पायलट और को-पायलट

वहीं सेकेंडों के अंदर लोगों को सांस लेने में दिक्कत होने लगी। कुछ देर बाद लोगों ने महसूस किया कि प्लेन नीचे की ओर जा रहा है लेकिन वो गिर नहीं रहा था। एक निश्चित गति से ऊंचाई कम हो रही थी, जिसका मतलब था कि कोई उसे उड़ा रहा था। वहीं पायलट और को पायलट सही सलामत थे। उन्होंने अपना ऑक्सीजन मास्क लगाया हुआ था और किसी तरह प्लेन को कंट्रोल करने की कोशिश कर रहे थे।

कुछ मिनटों बाद वो प्लेन को 10 हजार फ़ीट की ऊंचाई तक ले आए, जिससे ऑक्सीजन की समस्या सॉल्व हो गयी। लेकिन इतनी तेज़ी से फ्लाइट नीचे आई थी कि जर्जर प्लेन की बॉडी पर भयानक ज़ोर पड़ा और कॉकपिट वाला हिस्सा लगभग टेढ़ा हो गया। किसी भी वक्त वो बाकी प्लेन से टूटकर अलग हो सकता था।

रॉबर्ट स्कॉर्न्सथाइमर ने उड़ान की कमान अपने हाथ ली

इसके बाद पायलट रॉबर्ट स्कॉर्न्सथाइमर ने उड़ान की कमान अपने हाथ में ले ली और अपनी को-पायलट मिमी टॉम्पकिन्स से नजदीकी हवाई अड्डे से संपर्क करने को कहा। जिसके बाद पालयट ने सबसे नजदीकी हवाई अड्डा कहुलुई में संपर्क करने की कोशिश की।जो मावी नाम के एक द्वीप पर पड़ता था। लेकिन यहां पहुंचने के रास्ते में पहाड़ पड़ते थे और प्लेन की हालत ऐसी नहीं थी कि उसे पहाड़ों के ऊपर से ले जाया जा सके।

 एकबारगी रॉबर्ट ने सोचा प्लेन को पानी पर लैंड करा दिया जाए। लेकिन टूटे हुए प्लेन को पानी में उतारने में खतरा ज्यादा था। इसलिए उन्होंने सब कुछ किस्मत के हाथ छोड़, प्लेन को मोड़ने का फैसला लिया। किस्मत ने साथ भी दिया और प्लेन मुड़ने के बाद भी किसी तरह उड़ता रहा। इसी बीच पायलट मिमी का संपर्क मावी हवाई अड्डे से हुआ।

इस तरह बची 95 लोगों की जान

वहीं बातचीत से ग्राउंड अधिकारियों को समझ आ गया कि मुसीबत काफी बड़ी है। उन्होंने रनवे को खाली कराया और तुरंत एम्बुलेंस के लिए फोन कर दिया। प्लेन अभी भी उड़ रहा था. लेकिन कितनी देर तक उड़ता रह सकता था? पायलट ने इस सवाल की आज़माइश के लिए लैंडिंग गियर चेक किया, लेकिन प्लेन के आधे से ज्यादा सिस्टम ख़राब हो चुके थे। लैंडिंग गियर वाली लाइट में कोई हरकत न हुई। तभी नीचे से दूरबीन से देख रहे लोग काम आए।

उन्होंने वायरलेस पर बताया कि गियर खुल गया है। पायलट ने प्लेन तेज़ी से रनवे की ओर बढ़ा दिया, लेकिन फिर एक और मुसीबत सामने आ गई। प्लेन का लेफ्ट इंजन फेल हो चुका था। किस्मत मानों इम्तिहान लेने पर तुली थी। पायलट ने कोई चारा न देखते हुए प्लेन रनवे पर उतारा और किसी तरह घिसटते हुए वो रुक गया।

फ्लाइट अटेंडेंट क्लाराबेल लांसिंग हो गए थे गायब

इस हादसे में कुल 7 लोगों को गंभीर चोटें आईं। लगभग 60 लोग घायल हुए थे। उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया। तभी किसी को अहसास हुआ कि प्लेन की फ्लाइट अटेंडेंट क्लाराबेल लांसिंग गायब हैं। कुछ लोगों ने बताया कि उन्होंने लांसिंग को हादसे से ठीक पहले केबिन में खड़े देखा था। आखिर में पता चला कि लांसिंग फ़्यूसलेज टूटते ही हवा में खींच ली गई थी। तीन दिन तक समुद्र में उन्हें खोजने की कोशिश की गयी, लेकिन उनका कभी कोई पता न चला। इस हादसे की वो इकलौती कैजुअल्टी रहीं।

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