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झूठे केस और फर्जी सबूत पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र और राज्यों को भेजा नोटिस

झूठे केस और फर्जी सबूत पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र और राज्यों को भेजा नोटिस

Supreme Court Notice: देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक अहम जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को नोटिस जारी किया है। यह याचिका आपराधिक न्याय प्रणाली में बढ़ते झूठे मामलों, फर्जी आरोपों और गलत सबूतों की समस्या को लेकर दाखिल की गई है। यह सुनवाई मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने की। याचिका वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय द्वारा दाखिल की गई है। मामले की अगली सुनवाई 11 मई को होने की संभावना है।

याचिका में कही गई ये बात

याचिका में कहा गया है कि मौजूदा कानून के तहत कोई भी पीड़ित व्यक्ति झूठी शिकायत या फर्जी सबूत के खिलाफ सीधे कार्रवाई नहीं कर सकता, जब तक अदालत से अनुमति न मिले। इससे न्याय पाने में बाधा उत्पन्न होती है और दोषियों पर कार्रवाई करना मुश्किल हो जाता है। याचिकाकर्ता ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की कुछ धाराओं की व्याख्या पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इन धाराओं के कारण कई कानून प्रभावहीन हो गए हैं, जिससे लोग पुलिस में झूठी FIR दर्ज करा रहे हैं और अदालतों पर मामलों का बोझ बढ़ता जा रहा है।

फतेहपुर की घटना का किया गया जिक्र

याचिका में उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले की एक घटना का भी जिक्र किया गया, जहां एक परिवार ने कथित रूप से झूठे केस के डर से आत्महत्या कर ली थी। इसमें कहा गया कि ऐसे मामलों से निर्दोष लोगों को मानसिक, आर्थिक और सामाजिक नुकसान उठाना पड़ता है। इसके अलावा, याचिका में यह भी कहा गया कि नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो के आंकड़ों में झूठे मामलों या झूठी गवाही पर कार्रवाई का स्पष्ट डाटा नहीं है, जो सिस्टम की बड़ी कमी को दिखाता है।

कोर्ट ने मांगा जवाब

याचिका में सुप्रीम कोर्ट से मांग की गई है कि वह कानून की सही व्याख्या करे, ताकि झूठे मामलों के पीड़ित भी अदालत की अनुमति लेकर दोषियों के खिलाफ शिकायत दर्ज करा सकें। कोर्ट ने इस गंभीर मुद्दे को ध्यान में रखते हुए सभी पक्षों से जवाब मांगा है। यह मामला आने वाले समय में न्याय व्यवस्था में बड़े बदलाव की दिशा तय कर सकता है।

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