
Middle East War: श्रीलंका ने साफ कर दिया है कि वह मौजूदा अंतरराष्ट्रीय तनाव के बीच अपनी तटस्थ नीति से कोई समझौता नहीं करेगा। संसद में बोलते हुए राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने बताया कि अमेरिका और ईरान दोनों के सैन्य अनुरोधों को ठुकरा दिया गया है, ताकि श्रीलंका की जमीन का इस्तेमाल किसी भी सैन्य गतिविधि के लिए न हो। राष्ट्रपति ने बताया कि संयुक्त राज्य अमेरिका ने फरवरी के अंत में अनुरोध किया था कि वह जिबूती से दो लड़ाकू विमान, जिनमें एंटी-शिप मिसाइल लगी थीं, 4 से 8 मार्च के बीच मट्टाला इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उतारना चाहता है। लेकिन श्रीलंका ने इस प्रस्ताव को सख्ती से खारिज कर दिया।
अनुरोध को नहीं मिली मंजूरी
उसी दिन ईरान ने भी अपने तीन युद्धपोतों को कोलंबो बंदरगाह पर ठहरने की अनुमति मांगी थी। सरकार इस पर विचार कर रही थी, लेकिन बाद में तटस्थता बनाए रखने के लिए इस अनुरोध को भी मंजूरी नहीं दी गई। इस बीच, मार्च में श्रीलंका के तट के पास एक बड़ा घटनाक्रम हुआ, जब अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरान के युद्धपोत IRIS Dena को निशाना बनाकर डुबो दिया। इस हमले में कम से कम 84 नाविकों की मौत हो गई, जबकि 32 लोगों को श्रीलंकाई नौसेना ने बचा लिया।
शवों के लिए विशेष
मृतकों के शवों को बाद में एक विशेष विमान के जरिए ईरान भेजा गया। वहीं बचे हुए नाविकों को फिलहाल श्रीलंका में ही रखा गया है और उनका इलाज किया गया है। एक अन्य ईरानी जहाज IRIS Bushehr को श्रीलंका ने अपने जलक्षेत्र में सुरक्षित शरण दी है। इस जहाज के 219 क्रू मेंबर्स को सुरक्षा दी जा रही है, जबकि जहाज की मरम्मत भी की जा रही है।
तटस्थ नीति पर कायम रहेगा श्रीलंका
इसके अलावा तीसरा जहाज IRIS Lavan भारत के कोच्चि पोर्ट पहुंच गया, जहां उसके क्रू को मानवीय आधार पर शरण दी गई है। श्रीलंका और भारत दोनों ने साफ किया है कि ये कदम मानवीय आधार पर उठाए गए हैं। फिलहाल श्रीलंका ने स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी पक्ष का समर्थन नहीं करेगा और अपनी तटस्थ नीति पर कायम रहेगा।
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