मिडिल ईस्ट तनाव पर बोले मोहन भागवत, कहा- भारत निभा सकता है शांति स्थापित करने में बड़ी भूमिका

मिडिल ईस्ट तनाव पर बोले मोहन भागवत, कहा- भारत निभा सकता है शांति स्थापित करने में बड़ी भूमिका

Mohan Bhagwat Statement:राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई देश अब यह मानने लगे हैं कि भारत ही इस चल रहे युद्ध को खत्म कराने में अहम भूमिका निभा सकता है। नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए भागवत ने कहा कि वैश्विक स्तर पर लोग भारत की शांति स्थापित करने की क्षमता को पहचान रहे हैं। यह कार्यक्रम विश्व हिंदू परिषद के विदर्भ प्रांत कार्यालय के शिलान्यास के मौके पर आयोजित किया गया था।

भागवत ने बताया युद्धों का कारण

भागवत ने अपने संबोधन में कहा कि दुनिया में हो रहे अधिकांश युद्धों की जड़ स्वार्थ और वर्चस्व की भावना है। उन्होंने कहा कि युद्ध स्वार्थ का परिणाम है, जबकि दुनिया को संघर्ष नहीं, बल्कि आपसी सद्भाव की जरूरत है। उन्होंने यह भी बताया कि पिछले करीब 2000 वर्षों में दुनिया ने संघर्षों को सुलझाने के कई प्रयास किए, लेकिन अब भी कई समस्याएं बनी हुई हैं। उन्होंने धार्मिक असहिष्णुता, जबरन धर्म परिवर्तन और श्रेष्ठता-हीनता की सोच को भी वैश्विक तनाव का बड़ा कारण बताया। भागवत के अनुसार, जब तक इन सोचों में बदलाव नहीं होगा, तब तक स्थायी शांति संभव नहीं है।

भारतीय संस्कृति और दर्शन का किया जिक्र

भागवत ने भारतीय संस्कृति और दर्शन का जिक्र करते हुए कहा कि भारत की सोच ‘सब एक हैं’ के सिद्धांत पर आधारित है। उन्होंने कहा कि आधुनिक विज्ञान भी अब धीरे-धीरे इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि शांति केवल ताकत के दम पर नहीं लाई जा सकती, बल्कि इसके लिए एकता, अनुशासन और ‘धर्म’ के पालन की जरूरत होती है। भागवत ने जोर देकर कहा कि धर्म केवल ग्रंथों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसे जीवन में उतारना जरूरी है।

ताकतवर की जीत- भागवत

दुनिया के अन्य देशों से तुलना करते हुए उन्होंने कहा कि जहां बाकी दुनिया ‘ताकतवर की जीत’ के सिद्धांत पर चलती है, वहीं भारत मानवता के सिद्धांत को मानता है। अंत में उन्होंने कहा कि भारत की जिम्मेदारी है कि वह दुनिया को संतुलन की राह दिखाए और मानवता व धर्म के आधार पर वैश्विक शांति स्थापित करने में योगदान दे। 

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