
Sitaram Yechury Life: मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPI-M) के महासचिव सीताराम येचुरी का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। सीताराम येचुरी 72वर्ष के थे। उन्हें अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में इलाज के लिए भर्ती कराया गया था, जहाँ उन्हें आईसीयू में रखा गया था।
खबरों के अनुसार, येचुरी को सांस की नली में संक्रमण हो गया था और इससे पहले उन्हें निमोनिया जैसी बीमारी के इलाज के लिए 19अगस्त को एम्स में भर्ती कराया गया था। हाल ही में उन्होंने मोतियाबिंद की सर्जरी भी करवाई थी, जिससे उनकी स्वास्थ्य स्थिति और भी जटिल हो गई थी।
सीताराम येचुरी की राजनीतिक यात्रा और उनकी विरासत
सीताराम येचुरी भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी - मार्क्सवादी (CPI-M) के पांचवें महासचिव रहे। उन्होंने पार्टी के पूर्व महासचिव हरकिशन सिंह सुरजीत की गठबंधन निर्माण की विरासत को आगे बढ़ाया। येचुरी को 1996में संयुक्त मोर्चा सरकार के लिए साझा न्यूनतम कार्यक्रम का मसौदा तैयार करने में पी चिदंबरम के साथ सहयोग करने के लिए जाना जाता है। इसके अलावा, 2004में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) सरकार के गठन के दौरान भी उनके गठबंधन निर्माण प्रयासों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
मद्रास से दिल्ली तक, कैसी रही सीताराम येचुरी की जीवन यात्रा?
सीताराम येचुरी का जन्म 12अगस्त 1952को मद्रास (अब चेन्नई), तमिलनाडु में हुआ था। वे एक तेलुगु ब्राह्मण परिवार से थे, जिनके पिता सर्वेश्वर सोमयाजुला येचुरी आंध्र प्रदेश राज्य सड़क निगम में इंजीनियर थे और उनकी मां कल्पकम येचुरी एक सरकारी अधिकारी थीं। उनका बचपन हैदराबाद में बीता और उन्होंने हैदराबाद के ऑल सेंट्स हाई स्कूल से अपनी प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की। तेलंगाना आंदोलन के बाद, वे दिल्ली आ गए और प्रेजिडेंट एस्टेट स्कूल में दाखिला लिया।
अपनी असाधारण शैक्षणिक सफलता के कारण, उन्होंने 1970में सीबीएसई उच्चतर माध्यमिक परीक्षा में अखिल भारतीय स्तर पर पहला स्थान प्राप्त किया और दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफंस कॉलेज में प्रवेश लिया। हालांकि, 1975-1977के आपातकाल के दौरान उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया, जिससे उनकी पढ़ाई बीच में ही रह गई।
राजनीति में प्रवेश और संघर्ष
सीताराम येचुरी ने 1974में भारतीय राजनीति में कदम रखा और स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) के सदस्य बने। 1975में, वे भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी - मार्क्सवादी में शामिल हुए और आपातकाल के दौरान गिरफ्तार कर लिए गए। आपातकाल समाप्त होने के बाद, 1977में जेल से रिहा होकर वे जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष चुने गए। सीताराम येचुरी और सीपीआई-एम के पूर्व महासचिव प्रकाश करात ने जेएनयू को वामपंथियों का गढ़ बना दिया। 1978में, उन्हें एसएफआई का अध्यक्ष नियुक्त किया गया और 1984में सीपीआई-एम की केंद्रीय समिति के सदस्य बने। 1992में, उन्होंने सीपीआई-एम की 14वीं कांग्रेस में पोलित ब्यूरो के सदस्य के रूप में चयनित किया।
राज्यसभा में भूमिका और प्रमुख नियुक्तियाँ
सीताराम येचुरी 2005में पश्चिम बंगाल से राज्यसभा के लिए चुने गए। उच्च सदन में वे आम हित और लोक कल्याण के मुद्दों को उठाते रहे और कई मौकों पर सत्तारूढ़ सरकारों के खिलाफ व्यवधान पैदा किया। उनका यह कार्य लोकतांत्रिक अधिकार मानते हुए वे बार-बार आलोचना के शिकार हुए। 19अप्रैल 2015को, सीताराम येचुरी को विशाखापत्तनम में आयोजित 21वीं पार्टी कांग्रेस में सर्वसम्मति से CPI-M के महासचिव के रूप में चुना गया। इस पद पर उन्होंने प्रकाश करात की जगह ली।
व्यक्तिगत जीवन और परिवार
सीताराम येचुरी की शादी पत्रकार सीमा चिश्ती से हुई थी, और उनके एक बेटा है। उनकी पहली पत्नी वीना मजूमदार की बेटी थीं। उनकी बेटी अखिला येचुरी एक प्रतिष्ठित इतिहास की प्रोफेसर हैं, जिन्होंने सेंट एंड्रयूज विश्वविद्यालय और एडिनबर्ग विश्वविद्यालय में पढ़ाया है। सीताराम येचुरी का परिवार उनके योगदान और संघर्षों को हमेशा याद रखेगा।
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