Rohingya Refugees: मीलॉर्ड! समुद्र में फेंके गए 43 रोहिंग्या शरणार्थी, सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर

Rohingya Refugees: भारत सरकार पर 43 रोहिंग्या शरणार्थियों को जबरन समुद्र में फेंकने का गंभीर आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। याचिका मोहम्मद इस्माइल सहित दो रोहिंग्या शरणार्थियों द्वारा दायर की गई, जिसमें दावा किया गया है कि दिल्ली पुलिस ने 8 मई 2025 को इन लोगों को बायोमेट्रिक जानकारी लेने के बहाने बुलाया और बाद में उन्हें अंडमान के रास्ते समुद्र में छोड़ दिया। जिसके मानवता के खिलाफ अपराध करारा गया है।
याचिकाकर्ताओं का कहना
इन 43 रोहिंग्या शरणार्थियों को दिल्ली से पोर्ट ब्लेयर ले जाया गया, जहां उन्हें नौसेना के जहाजों पर चढ़ाया गया और लाइफ जैकेट देकर म्यांमार की ओर समुद्र में छोड़ दिया गया। साथ ही याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि यह कार्रवाई बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के की गई, जो भारतीय संवैधानिक मूल्यों और अंतरराष्ट्रीय शरणार्थी कानूनों का उल्लंघन करता है। जिन लोगों ने याचिका संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी द्वारा जारी कार्ड का हवाला देते हुए कहा कि इन लोगों को भारत में शरणार्थी के रूप में रहने का अधिकार है।
सुप्रीम कोर्ट का एक्शन
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लेते हुए याचिका पर सुनवाई के लिए 31 जुलाई 2025 की तारीख तय की है। जस्टिस सूर्यकांत, दीपांकर दत्ता और एन. कोटेश्वर सिंह की पीठ ने कहा कि भारत में रहने का अधिकार केवल भारतीय नागरिकों को है और गैर-भारतीयों के साथ विदेशी अधिनियम के तहत कार्रवाई होगी। जबकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि मामले की विस्तृत जांच की जाएगी। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केंद्र सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि रोहिंग्या शरणार्थियों की उपस्थिति राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है, जैसा कि असम और जम्मू-कश्मीर के मामलों में पहले बताया जा चुका है।
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