Radha Ashtami Special: जन्माष्टमी का पर्व हर कृष्ण भक्त के लिए बेहद खास होता है। हर साल भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी के दिन श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पावन पर्व मनाया जाता है। इसी दिन भगवान विष्णु अपने आठवें अवतार श्रीकृष्ण के रुप में जन्में थे। ठीक इसी तरह राधा रानी का प्राकट्यत्योसव भी बड़ी धूमधाम से सेलिब्रेट किया जाता है। हिंदू धर्म में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के 15 दिन बाद भाद्रपद शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन राधा अष्टमी का पर्व मनाया जाता है। ये दिन राधा रानी के जन्मोत्सव के रुप में समर्पित है। इस दौरान भक्त राधा-कृष्ण की भक्ति और पूजा में लीन नजर आते हैं। ऐसा कहा जाता है कि राधा अष्टमी के दिन घर में कुछ शुभ वस्तुओं को लाने से सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। साथ ही, राधा रानी का आर्शीवाद भी मिलता है। तो चलिए राधा अष्टमी किस दिन मनाई जाएगी और उन सभी शुभ वस्तुओं के बारे में जानते हैं।
राधा अष्टमी की तारीख
हिंदू धर्म में भाद्रपद शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को राधा अष्टमी का पर्व मनाया जाता है, जो 18 सितंबर 2026 को पड़ रही है। अष्टमी तिथि की शुरुआत 18 सितंबर दोपहर करीब 1 बजे होगी, जिसकी समापन अगले दिन 19 सितंबर दोपहर लगभग 3:26 बजे होगा। हिंदू परंपराओं की मानें तो राधा रानी का प्राकट्य मध्याह्न काल यानी दोपहर 12 बजे हुआ था। इसलिए राधा अष्टमी 18 सितंबर को ही मनाई जाएगी। इस दौरान पूजा का टाइम सुबह 11:01 बजे से दोपहर 1:38 बजे तक रहेगा।
Also read: Horoscope Today 12 September 2026, Aaj Ka Rashifal: नौकरी, कारोबार और प्रेम जीवन में कैसा रहेगा आज का दिन? जानें सभी 12 राशियों का हाल
राधा अष्टमी के दिन घर में लाएं ये शुभ वस्तुएं
1. मोर पंख: भगवान कृष्ण के मुकुट पर मोरपंख विराजमान रहता है, जो उनकी प्रिय वस्तुओं में से एक है। लेकिन राधा अष्टमी के दिन घर में मोर पंख लाना शुभ माना जाता है। जो राधा-कृष्ण भक्ति का प्रतीक माना जाता है। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है।
2. बांसुरी: भगवान कृष्ण और बांसुरी दोनों का संबंध बहुर गहरा है। बांसुरी कृष्ण के प्रेम का प्रतीक मानी जाती है। लेकिन राधा अष्टमी के दिन भी इसका विशेष महत्व है। इस दिन इसे घर में लाना शुभ माना जाता है, जिससे परिवार में प्रेम बढ़ता है।
3. तुलसी का पौधा: हिंदू धर्म में तुलसी के पौधे को अत्यंत शुभ और शुद्ध माना गया है। राधा रानी की पूजा में तुलसी का पौधा होना जरूरी होता है। इसके बिना पूजा अधूरी मानी जाती है और भगवान का आर्शीवाद भी नहीं मिलता।
4. चांदी की पायल या बिछिया: पायल या बिछिया सुहागिन महिलाओं की निशानी मानी जाती है। राधा रानी को तो सुहाग, प्रेम
और सौभाग्य से जोड़ा जाता है। ऐसे में राधा अष्टमी के दिन चांदी की पायल या बिछिया खरीदकर पहले राधा रानी को अर्पित करें या सुहागिन महिला को उपहार में दे।