
Mauni Amavasya Pitru Shanti: हिंदू धर्म में मौनी अमावस्या को एक अत्यंत पवित्र और आध्यात्मिक महत्व वाला दिन माना जाता है। यह माघ मास की अमावस्या तिथि पर मनाया जाता है, जब भक्त मौन व्रत रखकर ध्यान, स्नान और दान-पुण्य के माध्यम से अपने पूर्वजों को याद करते हैं। यह पर्व विशेष रूप से पितृ दोष से मुक्ति दिलाने वाला माना जाता है, क्योंकि इस दिन किए गए सरल उपायों से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और बाधाएं दूर होती हैं। तो चलिए इस पर्व की तिथि, महत्व और पितृ दोष निवारण के उपायों के बारे में जानते हैं।
मौनी अमावस्या की तिथि और शुभ मुहूर्त
वैदिक पंचांग के अनुसार, मौनी अमावस्या रविवार 18जनवरी 2026को मनाई जाएगी। अमावस्या तिथि की शुरुआत 18जनवरी को रात 12:03बजे से होगी और यह 19जनवरी को सुबह 1:21बजे तक रहेगी। इस दौरान ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 3से 6बजे के बीच) में उठकर पूजा-पाठ और स्नान करना सबसे शुभ माना जाता है। माघ मेला के दौरान प्रयागराज के संगम में स्नान का विशेष महत्व है, जहां लाखों भक्त इकट्ठा होते हैं।
मौनी अमावस्या का महत्व
मौनी अमावस्या को 'मौन की अमावस्या' भी कहा जाता है, क्योंकि इस दिन मौन व्रत रखने की परंपरा है। मान्यता है कि मौन रहकर व्यक्ति अपनी आंतरिक ऊर्जा को जागृत करता है और नकारात्मक विचारों से मुक्ति पाता है। यह दिन पितरों (पूर्वजों) की आत्मा को शांति प्रदान करने के लिए आदर्श है। ज्योतिष शास्त्र में इसे पितृ दोष निवारण का सर्वोत्तम अवसर माना जाता है, जहां स्नान, दान और तर्पण से पूर्वज प्रसन्न होते हैं और जीवन में समृद्धि, स्वास्थ्य और सफलता का आशीर्वाद देते हैं। माघ मास में गंगा स्नान से पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
पितृ दोष से मुक्ति के उपाय
ज्योतिष शास्त्रों की मानें तो जब कुंडली में पूर्वजों से जुड़े दोष होते हैं, जो जीवन में बाधाएं, स्वास्थ्य समस्याएं या आर्थिक हानि पैदा कर सकते हैं। ऐसे में मौनी अमावस्या पर पितरों को प्रसन्न करने और दोष से मुक्ति पाने के लिए निम्नलिखित उपाय अपनाएं। ये उपाय घर पर ही किए जा सकते हैं और इन्हें करने से जीवन में तरक्की के द्वार खुलते हैं।
1. गंगाजल से तर्पण:सुबह उठकर गंगा स्नान करें या घर पर पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान लें।
2. पितरों को जल अर्पित करें:फिर कुशा घास की मदद से पितरों को जल अर्पित करें। इससे पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है और पितृ दोष दूर होता है।
3. श्राद्ध या पिंडदान:पितरों की शांति के लिए श्राद्ध अनुष्ठान करें। चावल, दूध और तिल से बने पिंड दान करें। अगर संभव हो तो गंगा तट या पीपल के पेड़ के नीचे यह कार्य करें, जो तीन पीढ़ियों के पूर्वजों को प्रसन्न करता है।
4. मंत्र जप या पाठ:पितृ सूक्त या गीता के सातवें अध्याय का पाठ करें। मौन रहकर 'ओम पितृभ्यो नमः' मंत्र का जाप करें। यह उपाय क्रोधित पूर्वजों को शांत करता है और दोष से मुक्ति दिलाता है।
5. दान-पुण्य:स्नान के बाद काले तिल, गेहूं, चावल या गर्म वस्त्रों का दान करें। गरीबों को भोजन दान करें, जो सीधे पितरों तक पहुंचता है। गुप्त दान से विशेष फल मिलता है।
6. दीपक जलाना:शाम को सरसों के तेल का दीपक दक्षिण दिशा में जलाएं या पीपल के पेड़ के नीचे दीया प्रज्वलित करें। इससे पितृ लोक से लौटते पूर्वजों को मार्ग मिलता है और घर में सकारात्मकता आती है
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