
Makar Sankranti-Ekadashi Same Day: हिंदू धर्म में मकर संक्रांति का पर्व सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के साथ मनाया जाता है, जो उत्तरायण की शुरुआत का प्रतीक है। इस साल 2026में यह पर्व 14जनवरी को पड़ रहा है, लेकिन खास बात यह है कि इसी दिन षट्तिला एकादशी भी है। यह संयोग करीब 11से 23सालों बाद बन रहा है, जिससे भक्तों में खिचड़ी दान को लेकर काफी असमंजस है। क्योंकि मकर संक्रांति के बाद चावल और दाल दान की परंपरा है। चूंकि इसी दिन एकादशी भी पड़ रही है, जिसमें अनाज, चावल खाना या दान करने से परहेज किया जाता है। तो चलिए जानते हैं इस दुर्लभ संयोग में आप क्या-क्या दान कर सकते हैं।
संक्रांति और एकादशी का महत्व
हिंदू पंचांग के अनुसार, सूर्य देव 14जनवरी 2026को दोपहर करीब 3:13बजे मकर राशि में प्रवेश करेंगे। महापुण्य काल दोपहर 3:13से शाम 4:58बजे तक रहेगा, जिसमें स्नान, दान और पूजा का विशेष महत्व है। षट्तिला एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित है, जहां व्रत रखकर तिल से जुड़े छह प्रकार के दान किए जाते हैं। संक्रांति पर सूर्य पूजा, तिल-गुड़ का सेवन और दान का विधान है। इस संयोग में शास्त्र एकादशी के नियमों को प्राथमिकता देते हैं।
मकर संक्रांति उत्तर भारत में खिचड़ी, पतंगबाजी और दान के साथ और दक्षिण में पोंगल के रूप में मनाई जाती है। यह फसल कटाई का उत्सव है, जहां सूर्य की कृपा से समृद्धि की कामना की जाती है। एकादशी पर विष्णु भक्ति और व्रत से पाप नाश होता है। इस बार दोनों का संयोग अक्षय पुण्य देने वाला माना जा रहा है, लेकिन अनाज सेवन वर्जित होने से खिचड़ी खाने पर रोक है।
क्या करें दान?
एकादशी पर चावल या अनाज का सेवन नहीं किया जाता, इसलिए कई भक्त सोच रहे हैं कि संक्रांति पर खिचड़ी का दान कैसे करें। शास्त्रों के अनुसार, दान में कोई निषेध नहीं है, लेकिन सेवन वर्जित है। कुछ विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि खिचड़ी दान से बचें और इसकी जगह तिल-गुड़, ऊनी वस्त्र, फल या तिल से बने लड्डू दान करें। तिल का दान पाप नाश करता है और सूर्य देव को प्रसन्न करता है। यदि दान करना ही हो, तो कच्ची खिचड़ी (बिना पकाए) दान करें, लेकिन एकादशी नियमों का पालन करें।
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