
Sheetala Ashtami 2026: हिंदू धर्म में होली के बाद मनाया जाने वाला बसोड़ा या बसौड़ा पर्व इस साल काफी चर्चा में है। कई लोग पूछ रहे हैं कि बसोड़ा 11मार्च को है या 12मार्च? पंचांग और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बसोड़ा (शीतला अष्टमी) 11मार्च 2026, बुधवार को मनाया जाएगा। यह पर्व चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर पड़ता है, जो माता शीतला की पूजा के लिए समर्पित है।
बसोड़ा कब मनाया जाएगा?
हिंदू पंचांग के मुताबिक, अष्टमी तिथि की शुरुआत 11मार्च 2026को रात 1:54बजे से हो रही है और यह 12मार्च 2026को सुबह 4:19बजे तक रहेगी। उदय तिथि (सूर्योदय वाली तिथि) के आधार पर व्रत और पूजा 11मार्च को ही की जाती है। इसलिए, बसोड़ा 11मार्च को ही मनाया जाएगा, न कि 12मार्च को।
बसोड़ा का शुभ मुहूर्त
शीतला अष्टमी पूजा मुहूर्त: 11मार्च 2026को सुबह 6:36बजे से शाम 6:27बजे तक
यह मुहूर्त लगभग 11घंटे 51मिनट का रहेगा। इस दौरान श्रद्धालु माता शीतला की पूजा-अर्चना कर सकते हैं।
बसोड़ा का महत्व और परंपरा
बसोड़ा मुख्य रूप से उत्तर भारत, खासकर राजस्थान, गुजरात और उत्तर प्रदेश में लोकप्रिय है। यह माता शीतला को समर्पित है, जो चेचक, बुखार और संक्रामक रोगों से रक्षा करती हैं। इस दिन घर में चूल्हा नहीं जलाया जाता, ताकि अग्नि का उपयोग न हो। इसके बजाय, एक दिन पहले (10मार्च को) भोजन तैयार किया जाता है और ठंडा-बासी भोजन ही खाया जाता है। माता शीतला को भी यही बासी भोजन का भोग लगाया जाता है।
बसोड़ा की पूजा विधि
1. 10मार्च (शीतला सप्तमी) की शाम को घर की सफाई करें और भोजन बनाएं। भोजन में रोटी, चावल, दाल, सब्जी, दही, रबड़ी, हलवा, पूरी आदि शामिल करें।
2. 11मार्च कोसुबह उठकर स्नान करें, घर में चूल्हा न जलाएं।
3. पूजा:माता शीतला की मूर्ति या चित्र को साफ स्थान पर रखें। उन्हें बासी भोजन का भोग लगाएं। दही, छाछ, ठंडा पानी विशेष रूप से चढ़ाया जाता है।
4. आरती और प्रार्थना:माता की आरती करें और स्वास्थ्य, रोग निवारण की प्रार्थना करें।
5. व्रत:कई लोग इस दिन फलाहार या बासी भोजन ग्रहण करते हैं।
6. दान:गरीबों को बासी भोजन या दान दें।
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