Ranchi Protest: झारखंड में परीक्षा धांधली को लेकर एक तरफ छात्रों का आंदोलना जारी है। सोमवार यानी 10 अगस्त को छात्रों ने विधानसभा घेराव भी किया है। वहीं, दूसरी तरफ से परीक्षा में हुई धांधली की जांच में बड़े-बड़े खुलासे हो रहे हैं।
झारखंड परीक्षा धांधली की जांच सीआईडी कर रही है। जांच में खुलासा हुआ है कि कई अभ्यर्थी से 12-12 लाख रुपए वसूले गए थे। सिर्फ बोकारो में अभय तिवारी सहित 15 छात्रों को पेपर रटवाया गया था और जहां छात्रों ने 12-12 लाख रुपए यानी कुल एक करोड़ 80 लाख रुपए वसूले गए थे।
अभय तिवारी के कई खुलासे
यह वही अभय तिवारी उर्फ मनोज कुमार तिवारी है, जिसे सीआईडी ने जेपीएससी मेधा घोटाला मामले में गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। उस पर परीक्षा संचालित कराने वाली एजेंसी मेसर्स टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड का मार्केटिंग मैनेजर है। सीआईडी को पूछताछ में उसने अपने बड़े-बड़े खुलासे किए हैं। उसने बताया है कि उसे जेएसएससी की सीजीएल परीक्षा में 48वां रैक हासिल हुआ था। उसके अलावा उस परीक्षा में उसका भाई अक्षय तिवारी और अक्षय तिवारी की पत्नी सुषमा कुमारी का भी चयन हुआ था।
प्रश्न पत्र छापने के दौरान हुआ खेल
अक्षय तिवारी ने बताया कि जेएसएससी परीक्षा के बायोमीट्रिक का काम उसकी कंपनी टीडीपीएल को मिल रहा था। दर कम होने के चलते टीडीपीएल ने मना कर दिया था। इसके बाद जेएसएससी ने टीडीपीएल को डी-इंपैनल कर दिया था। इसके बाद परीक्षा कराने की जिम्मेदारी वेबेल को मिला था। इस कंपनी का मालिक मिथिलेश सिंह और सहयोगी खूंटी निवासी उमाकांत प्रमाणिक था। वेबेल को ही बायोमीट्रिक के अलावा प्रश्न पत्रों की छपाई का काम मिला था। अभय तिवारी ने दोनों से संपर्क कर परीक्षा का प्रश्न व उत्तर ले लिया था।
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