Post Office MIS Scheme: अगर आप अपनी बचत को सुरक्षित जगह निवेश करना चाहते हैं और साथ ही हर महीने नियमित कमाई भी चाहते हैं, तो पोस्ट ऑफिस की मंथली इनकम स्कीम (Post Office MIS) एक विकल्प हो सकती है। इस योजना में एकमुश्त निवेश करके हर महीने ब्याज के रूप में आय प्राप्त की जा सकती है। पति-पत्नी मिलकर ज्वाइंट अकाउंट खोलते हैं तो अधिकतम 15 लाख रुपये के निवेश पर 7.4 फीसदी की ब्याज दर के हिसाब से करीब 9,250 रुपये की मासिक ब्याज आय बनती है।
7.40 फीसदी ब्याज, 5 साल की अवधि
Post Office Monthly Income Scheme में फिलहाल 7.40 फीसदी सालाना ब्याज दर बताई गई है। योजना की मैच्योरिटी अवधि पांच साल है। 18 साल से अधिक उम्र का व्यक्ति इसमें खाता खोल सकता है। इसमें सिंगल के साथ-साथ ज्वाइंट अकाउंट खोलने की सुविधा भी मिलती है। खाता खोलने के लिए न्यूनतम 1,000 रुपये से निवेश शुरू किया जा सकता है। इच्छुक व्यक्ति जरूरी दस्तावेजों के साथ अपने नजदीकी पोस्ट ऑफिस में जाकर अकाउंट खुलवा सकते हैं।
एकमुश्त निवेश के बाद हर महीने कमाई
MIS एकमुश्त निवेश वाली योजना है। यानी इसमें पैसा जमा करने के बाद उस पर मिलने वाला ब्याज नियमित आय के तौर पर लिया जा सकता है। ब्याज का भुगतान खाता खुलने के अगले महीने से शुरू होता है और योजना की अवधि तक जारी रहता है। निवेशक अपनी जरूरत के हिसाब से ब्याज की रकम मासिक आधार पर ले सकते हैं। इसके अलावा ब्याज लेने के दूसरे विकल्प भी उपलब्ध हो सकते हैं।
ज्वाइंट अकाउंट में 15 लाख रुपये तक निवेश
योजना में सिंगल अकाउंट के लिए अधिकतम 9 लाख रुपये तक निवेश की सीमा है। वहीं पति-पत्नी या अन्य पात्र खाताधारक मिलकर ज्वाइंट अकाउंट खोलते हैं तो अधिकतम 15 लाख रुपये तक जमा कर सकते हैं। संयुक्त खाते में निवेश की हिस्सेदारी नियमों के अनुसार खाताधारकों की होती है। अगर ज्वाइंट अकाउंट में 15 लाख रुपये जमा किए जाते हैं और 7.40 फीसदी सालाना ब्याज मिलता है, तो सालभर में ब्याज 1,11,000 रुपये होगा। इसे 12 महीनों में बांटने पर हर महीने करीब 9,250 रुपये की ब्याज आय बनती है।
समय से पहले खाता बंद करने पर कटौती
अगर खाताधारक पांच साल की अवधि पूरी होने से पहले खाता बंद करता है तो कुछ कटौती का नियम लागू होता है। एक से तीन साल के बीच खाता बंद करने पर जमा राशि का 2 फीसदी और तीन से पांच साल के बीच बंद करने पर 1 फीसदी राशि की कटौती हो सकती है। वहीं खाताधारक की मृत्यु होने की स्थिति में मैच्योरिटी से पहले भी खाता बंद किया जा सकता है और जमा राशि नियमों के अनुसार नामित व्यक्ति यानी नॉमिनी को दी जाती है।
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