Chaitra Amavasya: चैत्र अमावस्या की शाम कर लें ये काम, पितृ दोष से मिलेगी मुक्ति

Chaitra Amavasya: चैत्र अमावस्या की शाम कर लें ये काम, पितृ दोष से मिलेगी मुक्ति

Chaitra Amavasya: वैदिक पंचांग के अनुसार आज यानी 18 मार्च 2026, बुधवार को चैत्र माह की अमावस्या तिथि है, जिसे चैत्र अमावस्या कहा जाता है। हिंदू धर्म में अमावस्या का विशेष महत्व माना गया है। मान्यता है कि इस दिन पूजा-पाठ और दान करने से पितर प्रसन्न होते हैं और अपने वंशजों को आशीर्वाद देते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जो लोग पितृ दोष से परेशान हैं, उन्हें इस दिन विधि-विधान से पितरों का तर्पण करना चाहिए। ऐसा करने से पितृ दोष दूर होता है और जीवन में सुख-शांति आती है। खासकर अमावस्या की शाम को कुछ विशेष उपाय करने का महत्व बताया गया है।

पीपल के पेड़ की करें पूजा

इस दिन पीपल के पेड़ की पूजा करना शुभ माना जाता है। सुबह पीपल की जड़ में जल अर्पित करें और शाम को पीपल के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं। ध्यान रखें कि दीपक आटे से बना होना चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है।

मंदिर में करें दीपदान

अमावस्या की शाम घर के मंदिर में पूजा करने के बाद नजदीकी मंदिर में दीपदान जरूर करें। दीपदान का मतलब है 11 या 21 दीपक जलाना। इस दौरान भगवान शिव और भगवान विष्णु की पूजा करना विशेष फलदायी माना जाता है।

अग्यारी जलाएं

पितरों को प्रसन्न करने के लिए शाम के समय अग्यारी जलाने की भी परंपरा है। इसमें कपूर और लौंग डालकर पूरे घर में घुमाया जाता है। इससे घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सुख-समृद्धि के रास्ते खुलते हैं।

तेल का दीपक जलाएं

इसके अलावा अमावस्या की शाम घर में अंधेरा नहीं रखना चाहिए। खासतौर पर मुख्य द्वार पर तेल का दीपक जरूर जलाएं। यदि संभव हो तो रसोई में पानी रखने वाली जगह पर भी दीपक रखें। इससे घर में सकारात्मक वातावरण बना रहता है।

बुजुर्ग का अपमान न करें

ध्यान रखें कि इस दिन किसी बुजुर्ग का अपमान न करें और किसी को अपशब्द न कहें। अमावस्या का दिन मन और शरीर की शुद्धि के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। अच्छे व्यवहार और सकारात्मक सोच से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

Leave a comment