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फ्रांस में गर्मी के कारण बंद हुए परमाणु रिएक्टर, क्या भारत में भी है ऐसा खतरा?

फ्रांस में गर्मी के कारण बंद हुए परमाणु रिएक्टर, क्या भारत में भी है ऐसा खतरा?

France Nuclear Reactors: यूरोप में पड़ रही भीषण गर्मी का असर अब बिजली उत्पादन पर भी दिखाई देने लगा है। फ्रांस में इस सप्ताह तीन परमाणु रिएक्टरों को बंद करना पड़ा, जबकि कई अन्य रिएक्टरों का उत्पादन भी कम कर दिया गया। हालांकि यह फैसला किसी तकनीकी खराबी या सुरक्षा खतरे की वजह से नहीं, बल्कि नदियों का पानी जरूरत से ज्यादा गर्म हो जाने के कारण लिया गया। दरअसल, परमाणु बिजली संयंत्रों में रिएक्टर से निकलने वाली गर्मी को ठंडा करने के लिए बड़ी मात्रा में पानी की जरूरत होती है। फ्रांस के कई परमाणु संयंत्र नदियों के पानी का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन इस बार भीषण गर्मी के कारण नदियों का तापमान इतना बढ़ गया कि रिएक्टरों से निकला गर्म पानी वापस नदी में छोड़ना पर्यावरण के लिए नुकसानदायक हो सकता था।

तीन रिएक्टर हुए बंद

फ्रांस के नियमों के अनुसार, अगर संयंत्र से निकलने वाला गर्म पानी नदी का तापमान तय सीमा से ऊपर पहुंचा देता है, तो इससे मछलियों और अन्य जलीय जीवों को खतरा हो सकता है। इसी वजह से बिजली कंपनी EDF ने पर्यावरण की सुरक्षा को देखते हुए तीन रिएक्टर बंद कर दिए और आठ अन्य का उत्पादन कम कर दिया। अब सवाल उठता है कि क्या भारत में भी ऐसी स्थिति बन सकती है? विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में ऐसा खतरा फिलहाल काफी कम है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि भारत के कई बड़े परमाणु संयंत्र, जैसे कुडनकुलम, तारापुर और कल्पक्कम, समुद्र के पानी से ठंडे किए जाते हैं। समुद्र का तापमान नदियों की तुलना में बहुत धीरे-धीरे बदलता है, इसलिए हीटवेव का असर उस पर कम पड़ता है।

भारत के इन राज्यों में है परमाणु संयंत्र

भारत के कुछ परमाणु संयंत्र राजस्थान, उत्तर प्रदेश और गुजरात जैसे राज्यों में भी हैं। लेकिन इन संयंत्रों में सीधे नदी का पानी इस्तेमाल करने के बजाय बड़े कूलिंग टावर लगाए गए हैं। ये टावर गर्मी को हवा में छोड़ते हैं, जिससे नदी का पानी ज्यादा गर्म नहीं होता और पर्यावरण पर असर भी कम पड़ता है।
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि भारत के लिए दूसरी चुनौती मौजूद है। अगर लंबे समय तक भीषण गर्मी के साथ सूखा पड़ता है और जलाशयों में पानी की कमी हो जाती है, तो कूलिंग टावरों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पाएगा। ऐसी स्थिति में बिजली उत्पादन कम करना पड़ सकता है।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ? 

विशेषज्ञों के मुताबिक, फ्रांस की मौजूदा स्थिति यह दिखाती है कि जलवायु परिवर्तन अब ऊर्जा क्षेत्र को भी प्रभावित कर रहा है। भारत ने अपने परमाणु संयंत्रों की डिजाइन में गर्म मौसम को ध्यान में रखा है, लेकिन भविष्य में बढ़ती गर्मी और अनियमित मानसून को देखते हुए जल संसाधनों का सही प्रबंधन सबसे बड़ी जरूरत होगी। इससे देश के परमाणु बिजली संयंत्रों का संचालन सुरक्षित और लगातार जारी रखा जा सकेगा।

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