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Nitish Kumar Era:बिहार में नीतीश युग का अंत! जानें उनके वो फैसले जिन्होंने बनाया 'सुशासन बाबू'

Nitish Kumar Era:बिहार में नीतीश युग का अंत! जानें उनके वो फैसले जिन्होंने बनाया 'सुशासन बाबू'

CM Nitih Kumar Decisive Decisions :बतौर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सियासी पारी 20 साल के बाद खत्म होने को है। 14 अप्रैल को कैबिनेट की बैठक के बाद वह इस्तीफा दे सकते हैं। इसके साथ ही नए मुख्यमंत्री का चुनाव भी हो सकता है। साल 2005 में पूर्ण रूप से मुख्यमंत्री बने नीतीश कुमार 2026 तक कुर्सी संभालते रहे हैं लेकिन, अब वह राज्यसभा पहुंच चुके हैं। 

उनके राज्यसभा जाने के बाद ये भी तय हो गया कि बिहार को नया मुख्यमंत्री मिलने जा रहा है। जिसकी घोषणा एक-दो दिन में कर दी जाएगी। ऐसे में चलिए जान लेते हैं नीतीश कुमार के 20 साल के शासन में कितना बदला बिहार और उन्हें सुशासन बाबू क्यों कहा गया। 

कानून-व्यवस्था का राज कायम 

नीतीश कुमार 2005 में एनडीए की अगुवाई में दूसरी बार मुख्यमंत्री और पांच साल का कार्यकाल पूरा किया। उन दिनों बिहार में कानून-व्यवस्था का खसता हाल था। लोग के मन में अपराधियों का खौफ इतना की रात में घर से निकलने से कतराते थे लेकिन, नीतीश कुमार ने बिहार के कानून-व्यवस्था को न सिर्फ दुरुस्त किया बल्कि लोगों को पुलिस पर भरोसा भी दिलाया। 

महिला सशक्तिकरण पर जोर 

बतौर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने महिला सशक्तिकरण पर काफी जोर दिया। मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना, मुख्यमंत्री महिला उद्यमी योजना, मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना, सरकारी नौकरी में महिला के लिए आरक्षण देने जैसी योजना उन्होंने शुरू की। इसके अलावा बिहार में जब शराबबंदी हुई तो महिलाओं का भरपूर समर्थन उनको मिला। 

सड़क और बिजली की सुविधा 

बिहार में नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री बनने के बाद सड़क और बिजली पर काफी फोक्स किया गया। बिहार की कच्ची और ईंट से बनी हुई सड़क को कंक्रीट की सड़कों में तब्दील किया गया और हाइवे का जाल बिछाया गया गया। साथ ही सड़क की कनेक्टिविटी बढ़ाई गई। इसी तरह बिजली की कमी को पूरा किया गया। नीतीश कुमार ने इन सभी फैसलों ने उन्हें सुशासन बाबू का तमगा दिला दिया। 

Also read: Bihar News:48 घंटे का इंतजार और बिहार को मिलेगा नया मुख्यमंत्री! CM हाउस में मंथन का दौर जारी

एनडीए के साथ कैस रहा तालमेल 

नीतीश कुमार ने साल 2013 में नरेंद्र मोदी को एनडीए का प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार घोषित करने के बाद भाजपा से गठबंधन तोड़ दिया था। जिसके बाद उन्होंने 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में राजद के साथ चुनाव लड़ा और महागठबंधन की सरकार बनी लेकिन, ठीक दो साल बाद लालू परिवार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगने के बाद वह 2017 में एनडीए के साथ वापस आ गए। फिर समय का चक्र बदला और नीतीश कुमार 2022 में महागठबंधन के साथ चले गए। हालांकि, 2024 लोकसभा चुनाव से ठीक पहले उन्होंने एक बार फिर एनडीए के साथ रिश्ते जोड़े और अभी वह एनडीए सरकार का हिस्सा हैं। 

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