Nepal Floods: नेपाल में भीषण बाढ़ और तबाही के बाद सरकार ने शुक्रवार को विदेशी मदद लेने का फैसला किया है। सरकार ने भारत, चीन, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया की विशेषज्ञ और तकनीकी टीमों को राहत एवं बचाव अभियान में शामिल होने की अनुमति दी है। यह फैसला नेपाल सरकार के पहले के रुख से अलग है। इससे पहले सरकार ने कहा था कि उसकी सुरक्षा एजेंसियां राहत और बचाव कार्य संभालने में सक्षम हैं।
सुरंगों में फंसे लोगों की होगी तलाश
नेपाल के राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन केंद्र की समीक्षा के बाद विदेशी विशेषज्ञों को कुछ खास क्षेत्रों में काम करने की अनुमति दी गई है। इन टीमों की सबसे बड़ी जिम्मेदारी सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश और उन्हें सुरक्षित बाहर निकालना होगी। इसके अलावा शवों की पहचान के लिए डीएनए टेस्ट और फोरेंसिक जांच में भी विशेषज्ञ मदद करेंगे। माना जा रहा है कि कई देशों के नागरिक अभी भी लापता हैं, जिसके चलते नेपाल सरकार पर अंतरराष्ट्रीय स्तर से मदद लेने का दबाव बढ़ रहा था।
1,924 लोगों के लापता होने की जानकारी
नेपाल की आपदा प्रबंधन अथॉरिटी ने बाढ़ के दो दिन बाद लापता लोगों की संख्या बढ़ाकर 1,924 कर दी है। इस भीषण आपदा में अब तक कम से कम 579 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। लापता लोगों में 517 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। इसके अलावा नदियों के किनारे चल रही हाइड्रोपावर परियोजनाओं में काम करने वाले 933 कर्मचारी भी लापता बताए जा रहे हैं। बुधवार सुबह अचानक आई पानी की तेज लहर ने इन इलाकों में भारी तबाही मचाई थी।
भारत ने बढ़ाया मदद का हाथ
भारत ने नेपाल को हर संभव मदद देने की पेशकश की है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार को नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल से फोन पर बातचीत की और राहत एवं बचाव अभियान में भारत के सहयोग की जानकारी दी। जयशंकर ने बताया कि भारत विशेषज्ञों की एक टीम नेपाल भेज रहा है, जो सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश में मदद करेगी।
बेली ब्रिज और मेडिकल टीम भी भेजेगा भारत
भारत नेपाल को बेली ब्रिज भी उपलब्ध कराएगा। बाढ़ से कई इलाकों में संपर्क व्यवस्था प्रभावित हुई है, ऐसे में इन पुलों की मदद से सड़क संपर्क बहाल करने में सहायता मिलेगी। जरूरत पड़ने पर भारत मेडिकल टीम और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल यानी एनडीआरएफ की टीम भी भेज सकता है। भारत की ओर से राहत सामग्री लेकर दो विमान पहले ही नेपाल पहुंच चुके हैं, जबकि तीसरा विमान भी भेजा जा रहा है।
पीएम मोदी ने भी की थी मदद की पेशकश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह से फोन पर बात की थी। इस दौरान उन्होंने नेपाल को हर संभव मानवीय सहायता देने का भरोसा दिलाया था। बातचीत के बाद पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर कहा था कि मुश्किल समय में भारत के लोग नेपाल के लोगों के साथ मजबूती से खड़े हैं। इसके कुछ ही घंटों बाद भारत ने राहत सामग्री की पहली खेप नेपाल भेज दी थी।
विदेशी नागरिकों के लापता होने से बढ़ा दबाव
नेपाल सरकार ने पहले अपने सुरक्षा बलों के जरिए राहत और बचाव अभियान चलाने पर भरोसा जताया था। विदेशी नागरिकों के लगातार लापता होने और कई इलाकों में स्थिति गंभीर बने रहने के बाद अब सरकार ने सीमित संख्या में विदेशी विशेषज्ञों को आने की अनुमति दी है। इससे सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश, शवों की पहचान और प्रभावित क्षेत्रों में राहत अभियान को गति मिलने की उम्मीद है।
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