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'बेगानी शादी में क्या काम...'INDIA ब्लॉक के प्रदर्शन से ओवैसी का किनारा, ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर अपनाया अलग रुख

'बेगानी शादी में क्या काम...'INDIA ब्लॉक के प्रदर्शन से ओवैसी का किनारा, ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर अपनाया अलग रुख

Owaisi on Gyanesh Kumar resignation: AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति करने वाले पैनल में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को शामिल करने की अपनी मांग दोहराई और मौजूदा चयन प्रक्रिया को सबसे बड़ी समस्या बताया। इस दौरान ओवैसी ने कहा कि उन्होंने दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ इंडिया ब्लॉक के विरोध प्रदर्शन में हिस्सा नहीं लिया क्योंकि AIMIM गठबंधन का हिस्सा नहीं है।    

ओवैसी ने कहा 'मैं वहां नहीं गया क्योंकि मैं उस (गठबंधन) का हिस्सा नहीं हूं। बेगानी शादी में मेरा क्या काम? मुख्य चुनाव आयुक्त के चयन की प्रक्रिया गलत है। यह पूरी तरह से कार्यपालिका के पक्ष में है। इस प्रक्रिया को बदलने की जरूरत है। मुख्य चुनाव आयुक्त का चयन सबसे बड़ी समस्या है। यह गलत है; इसे सुधारना होगा।'

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उन्होंने मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) को फिर से चुपके से एनआरसी करार दिया। उन्होंने कहा बिहार में SIR प्रक्रिया के दौरान भी मैंने आवाज उठाई थी। मैं मांग करता हूं कि मुख्य चुनाव आयुक्त के चयन के कानून में बदलाव किया जाए। मुख्य न्यायाधीश, प्रधानमंत्री और विपक्ष के नेतृत्व में चयन होना चाहिए। यह SIR गलत है। मेरा मानना ​​है कि एसआईआर चुपके से एनआरसी है।'

बता दें, पिछले महीने, सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर विभाजित फैसला सुनाया कि क्या मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित 2023 के कानून की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं को पांच न्यायाधीशों की बड़ी पीठ के पास भेजा जाना चाहिए या नहीं। इस कानून में चयन पैनल से मुख्य न्यायाधीश को हटा दिया गया था।

न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और सतीश चंद्र शर्मा की खंडपीठ इस प्रश्न पर भिन्न-भिन्न राय रखती थी। न्यायमूर्ति दत्ता ने बड़ी पीठ के पास भेजने की याचिका खारिज कर दी, जबकि न्यायमूर्ति शर्मा ने कहा कि इस मुद्दे पर संविधान पीठ द्वारा विचार किया जाना चाहिए। हालांकि, पीठ ने सर्वसम्मति से निर्देश दिया कि इस मामले को भारत के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष उचित संख्या वाली संविधान पीठ के गठन पर विचार करने के लिए रखा जाए, यह देखते हुए कि प्रश्न को पहले तीन न्यायाधीशों की पीठ के पास भेजने से कार्यवाही में अनावश्यक देरी होगी।

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