
Manipur Violence: मणिपुरएक बार फिर हिंसक प्रदर्शनों की चपेट में है। 08 जून को इंफाल पश्चिम और पूर्व सहित पांच जिलों में रातभर चली हिंसा ने राज्य को हिलाकर रख दिया। इस हिंसा में प्रदर्शनकारियों ने सरकारी कार्यालयों को आग के हवाले कर दिया और सुरक्षाबलों पर पथराव व हमले किए। जिसके चलते हालात को काबू करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले और बल प्रयोग करना पड़ा।
मणिपुर में हालात बेकाबू
08 जून की रात मणिपुर के इंफाल पश्चिम, इंफाल पूर्व, थौबल, काकचिंग और बिष्णुपुर जिलों में हिंसक प्रदर्शन हुए। प्रदर्शनकारियों ने सरकारी कार्यालयों, विशेष रूप से इंफाल में जीएसटी भवन और चुनाव विभाग के कार्यालयों को निशाना बनाते हुए आगजनी और तोड़फोड़ की। इसके अलावा सुरक्षाबलों पर पथराव भी किए गए। जिसके जवाब में पुलिस ने आंसू गैस और बल का इस्तेमाल कर भीड़ को तितर-बितर किया।
इंफाल पश्चिम के थंगमेइबंद इलाके में प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर टायर जलाए, जो विधानसभा भवन से सिर्फ 200 मीटर की दूरी पर है। इसके अलावा केसामपट ब्रिज पर प्रदर्शनकारियों ने राजभवन और मुख्यमंत्री सचिवालय की ओर बढ़ने की कोशिश की। लेकिन सुरक्षाबलों ने उनकी इस कोशिश को नाकाम कर दिया। हिंसा के बाद प्रभावित जिलों में चार या अधिक लोगों के एकत्र होने पर प्रतिबंध लगा दिया गया। साथ ही, अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लागू कर दिया गया।
मणिपुर में हिंसा की शुरुआत
मणिपुर में यह ताजा हिंसा जिरिबाम जिले में हाल के हत्याकांडों और सरकार की नीतियों के खिलाफ गुस्से का परिणाम मानी जा रही है। दरअसल, नवंबर 2024 में जिरिबाम जिले में छह लोगों तीन महिलाओं और तीन बच्चों के शव मिलने के बाद स मणिपुर में तनाव बढ़ गया। मेइतेई समुदाय का दावा है कि इन लोगों को कुकी समूह के सशस्त्र लोगों ने अगवा कर हत्या की थी। इससे मेइतेई समुदाय में आक्रोश फैल गया। जिस वजह से प्रदर्शनकारियों ने विधायकों और मंत्रियों के घरों पर हमले किए और सरकारी कार्यालयों को निशाना बनाया।
इसके बाद सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम (AFSPA) को जिरिबाम सहित छह पुलिस स्टेशन क्षेत्रों में 14 नवंबर 2024 को फिर से लागू कर दिया गया। कुकी और मेइतेई दोनों समुदायों ने इसका विरोध किया, जिसमें कुकी संगठनों ने केंद्रीय बलों की तैनाती के खिलाफ आर्थिक नाकेबंदी शुरू की। इसके अलावा मेइतेई समुदाय की अनुसूचित जनजाति (ST) दर्जे की मांग के खिलाफ कुकी समुदाय के विरोध ने हिंसा को भड़काया था। तब से 258 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं, 60,000 विस्थापित हुए, और 4,786 घर जला दिए गए।
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