
Supreme Court: भारत में बढ़ती छात्र आत्महत्याओं और मानसिक स्वास्थ्य की समस्याओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। कोर्ट ने देश भर के स्कूलों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों, कोचिंग सेंटरों और छात्रावासों के लिए 15 बिंदुओं की अंतरिम गाइडलाइन जारी की है। दरअसल, कोर्ट का ये फैसला आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में 14 जुलाई 2023 को एक 17 वर्षीय नीट छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले में आया। जिसमें कोर्ट ने पुलिस जांच में खामियों को रेखांकित करते हुए CBI जांच के आदेश भी दिए।
क्या है पूरा मामला?
बता दें, पश्चिम बंगाल के सुकदेब साहा की 17 वर्षीय बेटी, जो विशाखापत्तनम में आकाश बायजूस कोचिंग सेंटर में नीट की तैयारी कर रही थी। 16 जुलाई 2023 को हॉस्टल की बालकनी से गिरने से उसकी मौत हो गई थी। इसी मामले में पिता ने कोर्ट में दायर याचिका की थी। लेकिन पिता ने पुलिस जांच में पक्षपात और लापरवाही का आरोप लगाया। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के CBI जांच से इनकार के फैसले को रद्द कर दिया और मामले की गहन जांच के लिए CBI को जिम्मेदारी सौंपी।
स्टूडेंट सुसाइड मामलों पर कोर्ट ने क्या कहा?
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि छात्रों का सुसाइड करना हमारे सिस्टम की विफलताओं को दर्शाती हैं। इसलिए इसे अब अनदेखा नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब तक केंद्र और राज्य सरकारें इस मुद्दे पर व्यापक कानून नहीं बनातीं, तब तक ये दिशानिर्देश लागू रहेंगे। यह गाइडलाइन छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य, सुरक्षा और आत्महत्या रोकथाम पर केंद्रित हैं।
SC ने जारी की 15 बिंदुओं की गाइडलाइन
1.100 से अधिक छात्रों वाले सभी शिक्षण संस्थानों में कम से कम एक योग्य मानसिक स्वास्थ्य काउंसलर की नियुक्ति अनिवार्य होगी।
2.सभी संस्थानों और छात्रावासों में आत्महत्या रोकथाम हेल्पलाइन नंबर स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करना होगा।
3.शिक्षकों और कर्मचारियों को साल में दो बार मानसिक स्वास्थ्य पहचान, प्राथमिक सहायता और आत्मघाती व्यवहार वाले छात्रों की मदद के लिए ट्रेनिंग दी जाएगी।
4.कोचिंग सेंटरों में छात्रों को उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों के आधार पर अलग-अलग बैच में बाँटने या सार्वजनिक रूप से शर्मिंदा करने वाले नियमों और कार्यों पर पूरी तरह से रोक लगेगी।
5.संस्थानों को उत्पीड़न, भेदभाव या मानसिक दबाव की शिकायतों के लिए पारदर्शी और त्वरित शिकायत निवारण प्रणाली स्थापित करनी होगी।
6.शिकायतों पर कार्रवाई न करने को संस्थागत लापरवाही माना जाएगा, जिसके लिए संस्थान को ही कसूरवार माना जाएगा।
7.संस्थानों को छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बुनियादी ढाँचे, जैसे ऊँची इमारतों में सुरक्षा जाल और CCTV को मजबूत करना होगा।
8.अभिभावकों के साथ नियमित संवाद और मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता सत्र आयोजित किए जाएँगे।
9.संस्थानों को पाठ्यक्रम और मूल्यांकन प्रणाली को इस तरह डिज़ाइन करना होगा कि छात्रों पर अत्यधिक दबाव न पड़े और उनकी पढ़ाई से संबंधित चीजों का सॉल्व करने की कोशिश करें।
10.स्वास्थ्य और आत्महत्या रोकथाम पर नियमित कार्यशालाएँ और सेमिनार आयोजित किए जाएं।
11.हॉस्टल में रहने वाले छात्रों की निगरानी और काउंसलिंग के लिए विशेष व्यवस्था हो।
12.मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी शिकायतों को गोपनीय रखा जाए ताकि छात्र बिना डर के मदद मांग सकें।
13.छात्रों के बीच पीयर सपोर्ट ग्रुप बनाए जाएं, जो मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं को साझा करने का मंच प्रदान करें।
14.आत्महत्या के प्रयास या संदिग्ध मामलों में तत्काल कार्रवाई के लिए स्पष्ट प्रोटोकॉल बनाए जाएं।
15.प्रत्येक संस्थान में एक समिति गठित हो, जो इन दिशानिर्देशों के पालन की निगरानी करे।
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