PM Modi on Monsoon Session: आज 20 जुलाई सोमवार से संसद का मानसून सत्र शुरु हो गया है। इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्वास जताया कि संसद के मानसून सत्र में सार्थक चर्चा होगी। उन्होंने कहा ‘जहां तथ्य और तर्क होते हैं, वहां तूफान की कोई गुंजाइश नहीं होती।‘ उन्होंने भारत की आर्थिक मजबूती और हाल ही में हासिल की गई विकास उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। बता दें, मानसून सत्र के शुरु होने से पहले पत्रकारों से बात करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि विश्व, विशेष रूप से पश्चिम एशिया में, लगातार संघर्षों के खतरे का सामना कर रहा है, जिससे भारत जैसे ऊर्जा आयात करने वाले देशों के लिए गंभीर चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा ‘हम भली-भांति जानते हैं और पूरी दुनिया विभिन्न क्षेत्रों में युद्ध के लगातार खतरे को लेकर चिंतित है। पश्चिम एशिया में संघर्ष ने भारत जैसे ऊर्जा के लिए दूसरों पर निर्भर देशों के लिए एक बड़ा संकट पैदा कर दिया है। पेट्रोल, डीजल, एलपीजी, उर्वरक और रसायनों को लेकर कई बाधाएं और संकट उत्पन्न हुए। इसके बावजूद, भारत ने 7.7 प्रतिशत की विकास दर बनाए रखी और विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में उभरा।‘
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मॉनसून सत्र शुरु होने से पहले PM मोदी ने क्या कहा?
PM मोदी ने कहा कि भारत का प्रदर्शन देश की मजबूती और नई ऊंचाइयों को प्राप्त करने के दृढ़ संकल्प को दर्शाता है। उन्होंने आगे कहा ‘यह भारत की अंतर्निहित शक्ति को दर्शाता है और उस उत्साह और जोश की झलक पेश करता है जिसके साथ देश नई ऊंचाइयों को छूने की आकांक्षा रखता है। इसी पृष्ठभूमि में मानसून सत्र प्रारंभ हो रहा है; देश ने गति पकड़ ली है और संसद की भावना उस गति में नई ऊर्जा का संचार कर रही है।‘
PM मोदी ने आगे कहा ‘यह देश के सुधार एक्सप्रेस में सवार होने का ही परिणाम है कि भारत के युवा इतना साहस दिखा पा रहे हैं और सफलता प्राप्त कर रहे हैं। हाल ही में, राजस्थान में एक विशाल तेल रिफाइनरी राष्ट्र को समर्पित की गई। कुछ ही सप्ताह पहले, तीसरा सेमीकंडक्टर संयंत्र राष्ट्र को समर्पित किया गया। कुछ समय पहले ही, एक हरित हाइड्रोजन-चालित ट्रेन नागरिकों को समर्पित की गई; विश्व के बहुत कम देशों के पास यह सुविधा है। फिर भी, भारत द्वारा शुरू की गई हाइड्रोजन ट्रेन में सबसे शक्तिशाली इंजन है और यह अपनी तरह की सबसे लंबी ट्रेन है।‘
देश की प्रगति के लिए इन लोगों को दिया श्रेय
प्रधानमंत्री मोदी ने इन उपलब्धियों का श्रेय वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, नवप्रवर्तकों, उद्यमियों और श्रमिकों के सामूहिक प्रयासों को दिया। सत्र के दौरान रचनात्मक चर्चाओं का आह्वान करते हुए, प्रधानमंत्री ने सांसदों से देश की प्रगति में सकारात्मक योगदान देने और अपने अनुभव का उपयोग करने का आग्रह किया।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा ‘मुझे पूरा विश्वास है कि जहां तथ्य और तर्क होते हैं, वहां हंगामे की कोई गुंजाइश नहीं होती। राष्ट्र के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए सकारात्मक सोच आवश्यक है। हमारे सदन में अत्यंत अनुभवी सांसद हैं। वे चाहे किसी भी दल से जुड़े हों, उनके पास अपार अनुभव है। ऐसे समय में संसद और देश दोनों को उनके अनुभव और ज्ञान की आवश्यकता है। इसलिए, मेरा मानना है कि संसद का सुचारू संचालन, सार्थक चर्चाएं और राष्ट्र को आगे ले जाने का सामूहिक संकल्प समय की मांग है। देश के युवा, जो आकांक्षाओं से भरे हैं, चाहते हैं कि हम आगे बढ़ें।‘