रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ ED का एक्शन, गुरुग्राम ज़मीन घोटाले में चार्जशीट; करोड़ों की प्रॉपर्टी अटैच

रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ ED का एक्शन, गुरुग्राम ज़मीन घोटाले में चार्जशीट; करोड़ों की प्रॉपर्टी अटैच

ED Action Against Robert Vadra: गुरुग्राम के शिकोहपुर ज़मीन सौदे से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के पति और व्यवसायी रॉबर्ट वाड्रा की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। 17जुलाई को ED ने वाड्रा और उनकी कंपनी स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड सहित 10अन्य व्यक्तियों और संस्थाओं के खिलाफ दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। साथ ही, इस मामले में वाड्रा और उनकी संस्थाओं से जुड़ी 37.64करोड़ रुपये की 43अचल संपत्तियों को अटैच कर लिया गया है।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, यह मामला साल 2008में गुरुग्राम के शिकोहपुर गांव (वर्तमान में सेक्टर 83) में हुए एक ज़मीन सौदे से जुड़ा है। ED की जांच के अनुसार, रॉबर्ट वाड्रा की कंपनी स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड ने फरवरी 2008में ऑनकारेश्वर प्रॉपर्टीज से 3.53एकड़ ज़मीन 7.5करोड़ रुपये में खरीदी थी। इस सौदे में कई अनियमितताएं सामने आईं, जिनमें से एक यह थी कि ज़मीन का म्यूटेशन (हस्तांतरण) अगले ही दिन कर दिया गया। जबकि यह प्रक्रिया सामान्यतः तीन महीने से अधिक समय लेती है। इसके एक महीने बाद, तत्कालीन कांग्रेस सरकार के नेतृत्व में भूपेंद्र सिंह हुड्डा, जो उस समय हरियाणा के मुख्यमंत्री और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग के प्रभारी थे, ने इस ज़मीन पर हाउसिंग प्रोजेक्ट विकसित करने की अनुमति दी। इस अनुमति के बाद ज़मीन की कीमत में भारी उछाल आया।

जून 2008में, स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी ने इस ज़मीन को रियल एस्टेट कंपनी DLF को 58करोड़ रुपये में बेच दिया। जिससे वाड्रा को लगभग 50करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ। यह सौदा 2012में उस समय विवादों में आया जब तत्कालीन IAS अधिकारी अशोक खेमका, जो उस समय हरियाणा के लैंड कंसॉलिडेशन एंड लैंड रिकॉर्ड्स के महानिदेशक थे, ने इस सौदे के म्यूटेशन को रद्द कर दिया। खेमका ने इसे राज्य के समेकन कानून और संबंधित प्रक्रियाओं का उल्लंघन बताया।

ED की कार्रवाई

चार्जशीट में वाड्रा के अलावा ऑनकारेश्वर प्रॉपर्टीज, सत्यानंद याजी, केवल सिंह विर्क और अन्य व्यक्तियों और संस्थाओं के नाम शामिल हैं। यह चार्जशीट मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत दाखिल की गई है और इसका संज्ञान लेने के लिए राउज एवेन्यू कोर्ट में शुक्रवार को सुनवाई होनी है। ED ने अप्रैल 2025में वाड्रा से तीन दिनों तक लगातार पूछताछ की थी, जिसमें उनके बयान दर्ज किए गए।

ED ने इस मामले की जांच 2018 में गुरुग्राम पुलिस द्वारा दर्ज एक FIR के आधार पर शुरू की थी। FIR में आरोप लगाया गया था कि स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी ने फर्जी दस्तावेजों और वाड्रा के व्यक्तिगत प्रभाव का उपयोग करके ज़मीन खरीदी और फिर कमर्शियल लाइसेंस हासिल किया। जांच में यह भी सामने आया कि इस सौदे से प्राप्त मुनाफे को मनी लॉन्ड्रिंग का हिस्सा माना जा सकता है। ED ने 16 जुलाई 2025 को एक अस्थायी कुर्की आदेश जारी किया, जिसके तहत वाड्रा और उनकी कंपनी से जुड़ी 37.64 करोड़ रुपये की 43 संपत्तियां कुर्क की गईं।

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