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‘मेरे लिए पद जरूरी नहीं', इस्तीफे के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने तोड़ी चुप्पी; Gen Z को लेकर बोले - उन्हें गुमराह करने की कोशिश...

‘मेरे लिए पद जरूरी नहीं', इस्तीफे के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने तोड़ी चुप्पी; Gen Z को लेकर बोले - उन्हें गुमराह करने की कोशिश...

Dharmendra Pradhan on Gen Z: भाजपा सांसद और पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आखिरखार अपने पद से इस्तीफा देने पर चुप्पी तोड़ दी है। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी की आकांक्षाएं और संकल्प किसी भी मंत्री पद से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हैं, और उन्होंने जोर देकर कहा कि देश के हित हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को युवा पीढ़ी की आकांक्षाओं को समझाने का प्रयास किया था, जिन्होंने बाद में सीधे Gen Z से भी बातचीत की।

Gen Z को लेकर धर्मेंद्र प्रधान ने क्या कहा?

दरअसल, शनिवार को पश्चिमी ओडिशा के पद्म पुरस्कार विजेताओं को सम्मानित करने के लिए आयोजित 'मातिरा महाका' कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधान ने कहा ‘Gen Z हमारी ही है। कुछ लोगों ने जेनरेशन जेड को गुमराह करने की कोशिश की। मेरे लिए मंत्री पद प्रतिष्ठा का मुद्दा बिल्कुल नहीं था... नई पीढ़ी के संकल्प के आगे मेरी जिम्मेदारी कुछ भी नहीं है।‘ उन्होंने आगे कहा ‘मैंने प्रधानमंत्री को नई पीढ़ी के संकल्प की वास्तविकता समझाने का प्रयास किया, जिन्होंने बाद में सीधे 'जेनरेशन जेड' से बातचीत की। देश के हित से बढ़कर कुछ भी महत्वपूर्ण नहीं है। हम युवा पीढ़ी की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।‘

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मालूम हो कि पिछले महीने, 25 जुलाई को, NEET-UG 2026 परीक्षा परिणाम लीक विवाद को लेकर देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों के बीच प्रधान ने केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने कहा कि वे छात्रों के व्यापक हित में पद छोड़ रहे हैं ताकि देश के युवा ‘भ्रम के जाल’ में न फंसें। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे अपने त्यागपत्र में प्रधान ने शिक्षा क्षेत्र से अपने लंबे जुड़ाव पर प्रकाश डाला और भारत के युवाओं की आकांक्षाओं के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया।

अच्छी शिक्षा प्रणाली एक मजबूत राष्ट्र की नींव है - धर्मेंद्र प्रधान

धर्मेंद्र प्रधान ने आगे कहा ‘चार दशकों से अधिक समय से मैं छात्रों, शिक्षकों और शिक्षा सुधार के उद्देश्य से जुड़ा रहा हूं। मेरा हमेशा से मानना ​​रहा है कि एक मजबूत, समावेशी और प्रगतिशील शिक्षा प्रणाली एक मजबूत राष्ट्र की नींव है।‘ इसके बाद केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिया गया। बाद में केंद्र ने परीक्षा में अनुचित साधनों के दुरुपयोग और पेपर लीक के खिलाफ कड़े उपाय करने हेतु सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक संसद में पेश किया।

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