Mother’s Day: आखिरकार क्यों मनाया जाता है मदर्स डे, जानें इसके पीछे की वजह

Mother’s Day: आखिरकार क्यों मनाया जाता है मदर्स डे, जानें इसके पीछे की वजह

नई दिल्ली: इस दूनिया मेंलाने वाली मां। जन्म के बाद जीवन देने वाली मां। जीवन के बाद पहली अध्यापिक मां। अगर हम मां के बारे में लिखने बैठे तो पूरा दिन निकल जाएगा। क्योंकि इस दूनिया में जितना एक मां अपने बच्चों के लिए करती है, शायद ही कोई ओर कर सकें। खैर, आज मदर्स डे है और  हर किसी के व्हाट्सएप ग्रुप में मदर्स डे की बधाईयां होगी और हर किसी के स्टेटस पर उनकी मां की फोटो होगी।

मदर्स डे का पता होने के बाद अपने स्टेटस पर तो सभी फोटो लगा लेते है लेकिन क्या आपके दिमाग में ये बात कभी आई है कि हम मदर्स डे क्यों मनाते है। ज्यादातर लोग नहीं जानते हम मदर्स डे क्यों मनाते है। हर साल की 8 मई को ही मदर्स डे क्यों मनाते है। पहला मडर्स डे कब मनाया गया। चलिए आज हम आपको इस सभी सवालों के जवाब देते है।

दरअसल इस दिन को मां के नाम पर रखने के लिए सबसे पहले एना जार्विस नाम की महिला ने शुरूआत की थी। उन्होंने यह दिन अपनी मां को समर्पित किया और इसकी तारीख इस तरह चुनी कि वह उनकी मां की पुण्यतिथि 9 मई के आसपास ही पड़े। इस साल मदर्स डे 8 मई यानी आज है। बता दें कि मदर्स डे की शुरुआत एना जार्विस की मां एन रीव्स जार्विस करना चाहती थीं। लेकिन1905 में एन रीव्स जार्विस की मौत हो गई और उनका सपना पूरा करने की जिम्मेदारी उनकी बेटी एना जार्विस ने उठा लिया। एना ने इस दिन लोगों को अपनी मां के त्याग को याद करें और उसकी सराहना करने का विचार रखा। जो लोगों को इतना पसंद आया कि इसे हाथोंहाथ ले लिया गया और एन रीव्स के निधन के तीन साल बाद यानी सन् 1908 में पहली बार मदर्स डे मनाया गया। 

दुनिया में जब पहली बार मदर्स डे मनाया गया तो एना जार्विस एक तरह से इसकी पोस्टर गर्ल थीं। उन्होंने उस दिन अपनी मां के पसंदीदा सफेद कार्नेशन फूल महिलाओं को बांटे, जिन्हें चलन में ही ले लिया गया। इन फूलों का व्यवसायीकरण इस कदर बढ़ा कि आने वाले वर्षों में मदर्स डे पर सफेद कार्नेशन फूलों की एक तरह से कालाबाजारी होने लगी। लोग ऊंचे से ऊंचे दामों पर इन्हें खरीदने की कोशिश करने लगे। यह देखकर एना भड़क गईं और उन्होंने इस दिन को खत्म करने की मुहिम शुरू कर दी। 

जिसके बाद एना ने सफेद कार्नेशन फूलों की बिक्री को छोड़कर टॉफी, चॉकलेट और तमाम तरह के गिफ्ट को चलन में आने लगी। ऐसे में एना ने लोगों को फटकारा भी। उन्होंने कहा कि लोगों ने अपने लालच के लिए बाजारीकरण करके इस दिन की अहमियत ही घटा दी है। साल 1920 में एना ने लोगों से फूल न खरीदने की अपील भी की। एना अपने आखिरी वक्त तक इस दिन को खत्म करने की मुहिम में लगी रहीं। उन्होंने इसके लिए हस्ताक्षर अभियान भी चलाया, लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी और 1948 के आसपास एना इस दुनिया को अलविदा कह गईं। हालांकि मदर्स डे को एना के रिश्तेदार नहीं मनाया, क्योंकि वे एना का काफी सम्मान करते थे। वे एना की उस भावना से काफी प्रभावित थे, जिसमें कहा गया था कि बाजारीकरण ने इस बेहद खास दिन के मायने ही बदल दिए। वहीं अधिकांश देशों में मदर्स डे मई के रविवार को मनाया जाता है,इनमें अमेरिका, कनाडा, अधिकांश यूरोपीय देश, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, भारत, चीन, जापान, फिलीपींस और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं।

 

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