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मोदी सरकार ने सुलझाए दशकों पुराने जल विवाद, हरियाणा हरियाणा सहित कई राज्यों के बीच बने ऐतिहासिक समझौते

मोदी सरकार ने सुलझाए दशकों पुराने जल विवाद, हरियाणा हरियाणा सहित कई राज्यों के बीच बने ऐतिहासिक समझौते

River Water Disputes: केंद्र सरकार ने राज्यों के बीच वर्षों से चले आ रहे कई बड़े जल विवादों को सुलझाने की दिशा में अहम कदम उठाया है। पिछले एक महीने में कई महत्वपूर्ण समझौते हुए हैं, जिनसे लंबे समय से चले आ रहे विवाद खत्म होने की उम्मीद बढ़ी है। सरकार का कहना है कि आने वाले दिनों में भी ऐसे कई और समझौते हो सकते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत बनाने के लक्ष्य के तहत राज्यों के बीच सहयोग बढ़ाने और पुराने विवाद खत्म करने पर जोर दिया है। इसी दिशा में गृह मंत्री अमित शाह और जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने पहल करते हुए विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ कई दौर की बैठकें कीं।

29 जून को हरियाणा और राजस्थान के बीच करीब 30 साल पुराने यमुना जल विवाद पर ऐतिहासिक समझौता हुआ। इस समझौते के तहत दोनों राज्यों ने यमुना जल परियोजना को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई। इससे राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र और हरियाणा के सीमावर्ती इलाकों में पानी की उपलब्धता बेहतर होने की उम्मीद है। इसके बाद 7 जुलाई को मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र के बीच नर्मदा नदी से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे वित्तीय विवाद का समाधान हुआ। चारों राज्यों ने 'वन-टाइम सेटलमेंट' समझौते पर हस्ताक्षर किए। इससे पुनर्वास, मुआवजा और परियोजनाओं के खर्च से जुड़े पुराने विवाद खत्म हो गए।

छह राज्यों बीच होगा ये समझौता

अब 15 जुलाई को छह राज्यों हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान के बीच किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना पर बड़ा समझौता होने की संभावना है। यह परियोजना यमुना की सहायक टोंस नदी पर बनेगी। इससे पीने के पानी की आपूर्ति, सिंचाई और बिजली उत्पादन में बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है। सूत्रों के अनुसार बिहार और झारखंड के बीच सोन नदी जल विवाद भी जल्द खत्म हो सकता है। प्रस्तावित समझौते के तहत बिहार को 5.75 एमएएफ और झारखंड को 2 एमएएफ पानी मिलेगा। इससे इंद्रपुरी जलाशय परियोजना का रास्ता भी साफ होगा और किसानों को लाभ मिलेगा।

पुराने विवादों को भी सुलझाने की कोशिश

इसके अलावा केंद्र सरकार कृष्णा नदी और कावेरी नदी से जुड़े पुराने विवादों को भी सुलझाने की कोशिश कर रही है। कृष्णा नदी को लेकर कर्नाटक और तेलंगाना के बीच संयुक्त बैराज बनाने पर सहमति बनी है, जबकि कावेरी विवाद में भी समाधान की दिशा में प्रयास जारी हैं। सरकार का मानना है कि इन समझौतों से वर्षों से अटकी परियोजनाओं को गति मिलेगी, किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिलेगा और करोड़ों लोगों को पीने के पानी की बेहतर सुविधा मिल सकेगी। साथ ही राज्यों के बीच सहयोग और सहकारी संघवाद की भावना भी और मजबूत होगी। 

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