मल्लिकार्जुन खरगे ने पीएम मोदी को लिखी चिट्ठी, जातीय जनगणना को लेकर दिए तीन सुझाव

मल्लिकार्जुन खरगे ने पीएम मोदी को लिखी चिट्ठी, जातीय जनगणना को लेकर दिए तीन सुझाव

Caste Census In India: केंद्र सरकार के द्वारा जातीय जनगणना करवाने की घोषणा के बाद देशभर में चर्चा तेज हो गई है। विपक्षी दलों के द्वारा जहां इस फैसले को अपनी जीत बताई जा रही है तो वहीं, सत्ता पक्ष इसे मोदी सरकार की उपलब्धि बता रही है। इस बीच मंगलवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। खरगे ने उस पत्र के माध्यम से सरकार को जातीय जनगणना को लेकर तीन सुझाव दिए हैं। जिसमें तेंलगाना में हुई जातीय सर्वे के मॉडल को अपनाने, आरक्षण की 50%सीमा को हटाने और निजी व शिक्षण संस्थानों में एससी-एसटी-ओबीसी को आरक्षण देने के प्रावधानों को शामिल करना है।

खरगे ने पत्र में क्या लिखा?

कांग्रेस अध्यक्ष ने पत्र में लिखा, "मैंने 16 अप्रैल 2023 को आपको पत्र लिखकर जाति जनगणना कराने की भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की मांग आपके समक्ष रखी थी। दुर्भाग्य से मुझे उस पत्र का कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद आपकी पार्टी के नेताओं और आपने खुद इस जायज मांग को उठाने के लिए कांग्रेस पार्टी और कांग्रेस नेतृत्व पर लगातार हमला किया। आज आप खुद स्वीकार कर रहे हैं कि यह मांग गहन सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण के हित में है।" दो पन्नों की चिट्ठी में खरगे ने कुल तीन बिंदुओं को शामिल किया है। साथ ही उन्होंने लिखा कि जातीय जनगणना को समाज के लिए विभाजनकारी नहीं माना जाना चाहिए, क्योंकिइससे वंचितों, पिछड़ों और हाशिये पर खड़े लोगों को उनका अधिकार मिलेगा।

जयराम रमेश ने क्या कहा?

कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने खरगे के पत्र को शेयर करते हुए कहा, "16 अप्रैल 2023 को कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे ने जाति जनगणना की मांग करते हुए पीएम को पत्र लिखा था। कल खड़गे ने फिर पीएम को पत्र लिखा। पीएम ने अचानक जाति जनगणना की घोषणा ऐसे समय में की जब पूरा देश पहलगाम हमले से दुखी है। कांग्रेस अध्यक्ष ने 3 सुझाव दिए हैं। पहला और सबसे महत्वपूर्ण, जाति जनगणना के लिए प्रश्नावली का मसौदा ठीक से तैयार किया जाना चाहिए। दूसरा सुझाव आरक्षण पर 50% की सीमा को हटाना है। हमें उम्मीद है कि पीएम मोदी जाति जनगणना पर सर्वदलीय बैठक बुलाएंगे।"

इन तीन बिंदुओं को किया गया शामिल:-

  • जातीय जनगणना में तेलंगाना मॉडल को अपनाने की मांग
  • 50%आरक्षण की सीमा को तोड़ने की मांग
  • निजी व शिक्षण संस्थानों में SC-ST-OBCको आरक्षण देने का प्रावधान

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