
नई दिल्ली: चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को महावीर जयंती मनाई जाती है। जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर और धार्मिक गुरु वर्धमान महावीर थे। महावीर स्वामी को भगवान महावीर भी कहते हैं। 30 वर्ष की उम्र में ही वर्धमान स्वामी ने वस्तुनिष्ठ दुनिया को पीछे छोड़ मोक्ष की राह पर जाने का फैसला कर लिया था। महावीर स्वामी अपने जीवन में पांच सिद्धांतों पर चले थे, अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह, अस्तेय और ब्रह्मचर्य।
इस बार महावीर जयंती 14 अप्रैल के दिन मनाई जा रही है। इस दिन जैन धर्म को मानने वाले प्रार्थना व समारोह आयोजित करते हैं, साथ ही महावीर चालीसा का भी पाठ करने की मान्यता है। इस दिन धार्मिक विश्वासों के अनुसार महावीर चालीसा पढ़ने से मन में विवेक आता है और बुद्धि का विकास होता है। इस चलते खासतौर पर महावीर जयंती के दिन महावीर चालीसा पढ़ी जाती है।
जैन धर्म के अनुयायी महावीर जयंती को हर्षोल्लास से मनाते हैं। भगवान महावीर ने पांच सिद्धांत बताए जो आज भी समृद्ध जीवन और आंतरिक शांति की ओर ले जाते हैं| सैकड़ों वर्ष पूर्व भगवान महावीर ने विश्व को अहिंसा, जीव दया सहित मानव हित के कई संदेश दिए। वर्तमान समय में हमें अहिंसा और जीवों पर दया व महावीर के सिद्धांत ही ऐसी आपदाओं से पार पाने का मार्ग बताते हैं।
महावीर स्वामी अहिंसा के पुजारी थे उनका मानना था कि इस सृष्टि में जितने भी त्रस जीव आदि की हिंसा नहीं करनी चाहिए। उन्हें अपने रास्ते पर जाने से नहीं रोकना चाहिए। उन सब के प्रति समानता व प्रेम का भाव रखना चाहिए, साथ ही उनकी रक्षा करनी चाहिए। इस दौर में अहिंसा के व्रत का पालन किए जाने की सबसे ज्यादा जरूरत है।
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