International Women’s Day 2026: 'गिव टू गेन' थीम के साथ आज मनाया जा रहा अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस, जानें इस दिन का इतिहास

International Women’s Day 2026: 'गिव टू गेन' थीम के साथ आज मनाया जा रहा अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस, जानें इस दिन का इतिहास

Give To Gain Theme Women’s Day: हर साल 08मार्च को दुनिया भर में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस (International Women's Day) मनाया जाता है, जो महिलाओं की सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक उपलब्धियों को सम्मानित करने के साथ-साथ लिंग समानता की दिशा में कार्रवाई का आह्वान करता है। संयुक्त राष्ट्र (UN) ने इस साल की आधिकारिक थीम "राइट्स. जस्टिस. एक्शन. फॉर ऑल वुमेन एंड गर्ल्स" घोषित की है, जो महिलाओं के अधिकारों को सुनिश्चित करने, न्याय प्रणाली को मजबूत बनाने और भेदभावपूर्ण कानूनों को खत्म करने पर केंद्रित है।

वहीं, अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की प्रमुख वेबसाइट ने थीम "गिव टू गेन" रखी है, जो उदारता और सहयोग के माध्यम से लिंग समानता को बढ़ावा देने पर जोर देती है। यह दिवस महिलाओं के संघर्षों की याद दिलाता है और भविष्य में समानता की दिशा में कदम उठाने की प्रेरणा देता है।

इस साल की थीम

संयुक्त राष्ट्र की थीम 'राइट्स. जस्टिस. एक्शन. फॉर ऑल वुमेन एंड गर्ल्स' वैश्विक चुनौतियों पर प्रकाश डालती है, जैसे संघर्ष, दमन और राजनीतिक तनाव जो महिलाओं के अधिकारों को कमजोर कर रहे हैं। यह थीम महिलाओं और लड़कियों को समान न्याय सुनिश्चित करने के लिए कानूनी बाधाओं को दूर करने, हानिकारक प्रथाओं को समाप्त करने और सामाजिक मानदंडों को बदलने का आह्वान करती है। UN का कहना है कि आज महिलाओं के पास पुरुषों की तुलना में केवल 64%कानूनी अधिकार ही उपलब्ध हैं, जिसे सुधारने की जरूरत है।

वहीं 'गिव टू गेन' थीम उदारता के महत्व पर जोर देती है, जहां महिलाओं में निवेश करने से समाज, अर्थव्यवस्था और स्वास्थ्य प्रणाली मजबूत होती है। यह थीम कहती है कि जब हम देते हैं, तो हम प्राप्त करते हैं - अर्थात महिलाओं को अवसर देकर हम सभी लाभान्वित होते हैं। दोनों थीम्स महिलाओं की भूमिका को न्याय और प्रगति के केंद्र में रखती हैं।

8मार्च को ही क्यों मनाया जाता है महिला दिवस?

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की तारीख 8मार्च का ऐतिहासिक महत्व है, जो 20वीं सदी की शुरुआत में महिलाओं के श्रम आंदोलनों से जुड़ी है। इसकी जड़ें 1908में न्यूयॉर्क में गारमेंट वर्कर्स की हड़ताल से जुड़ी हैं, जहां महिलाओं ने बेहतर मजदूरी, काम के घंटे और मतदान के अधिकार की मांग की थी। 1910में जर्मन कार्यकर्ता क्लारा जेटकिन ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर महिला दिवस मनाने का प्रस्ताव रखा और 1911में पहली बार ऑस्ट्रिया, डेनमार्क, जर्मनी और स्विट्जरलैंड में 19मार्च को इसे मनाया गया।

लेकिन 1917 में रूस में महिलाओं की हड़ताल ने इसे 8 मार्च से जोड़ दिया। उस साल 8 मार्च (जूलियन कैलेंडर में 23 फरवरी) को पेट्रोग्राड (अब सेंट पीटर्सबर्ग) में महिलाओं ने रोटी और शांति की मांग के साथ हड़ताल की, जो रूसी क्रांति की शुरुआत बनी और tsar निकोलस द्वितीय के पतन का कारण बनी। 1921 में इस तारीख को स्थायी रूप से तय किया गया, और 1977 में संयुक्त राष्ट्र ने इसे आधिकारिक मान्यता दी। आज यह तारीख महिलाओं के संघर्ष और विजय की प्रतीक है।

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