
Land For Job Scam Updates: साल के अंत में बिहार विधानसभा चुनाव होना है। लेकिन इससे पहले राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। दरअसल, बुधवार को जमीन के बदले नौकरी देने के मामले में सीबीआई ने राउज एवेन्यू कोर्ट में जवाबी हलफनामा दाखिल किया है। सीबीआई ने अपने हलफनामे में बताया कि तत्कालीन रेल मंत्री और इस घोटाले के मुख्य आरोपी लालू यादव ने सरकारी आधिकारियों पर दवाब बना कर उन लोगों को नौकरी देने की बात कही, जिन्होंने लालू यादव और उनके परिवार के नाम जमीन ट्रांसफर की थी। गौरतलब है कि सीबीआई ने करोड़ों रुपये के इस घोटाले में 102 लोगों को आरोपी बनाया है। आरोप के अनुसार, लालू परिवार ने 4.39 करोड़ रुपये की एक लाख वर्ग फुट से ज्यादा जमीन को सिर्फ 26 लाख रुपये में खरीदी थी।
सीबीआई ने जवाबी हलफनामे में क्या कहा?
सीबीआई ने कोर्ट को बताया कि तत्कालीन रेल मंत्री लालू यादव ने ग्रुप-डी की नौकरी के लिए आवेदन करने वालों के आवेदनों को मंजूरी देने के लिए रेलवे के अधिकारियों को अतिरिक्त दवाब डाला था। जिनके आवेदनों को मंजूरी के लिए दवाब बनाया गया था, उन सभी लोगों ने लालू यादव और उनके परिवार के नाम औने-पौने दामों पर जमीन बेची था या गिफ्ट की थी। सीबीआई के अनुसार, एक ही दिन में कई आवेदनों को मंजूरी दे दी गई थी, जबकि रिक्तियों के लिए कोई विज्ञापन ही नहीं था। साथ ही सीबीआई ने आरोप लगाया कि जिन्हें नौकरी दी गई, उनके द्वारा प्रस्तुत किए गए कागजात में भी गड़बड़ी मिली है।
क्या है लैंड फॉर जॉब घोटाला?
साल 2004 से 2009 तक लालू प्रसाद यादव देश के रेल मंत्री रहे थे। इसी दौरान लैंड फॉर जॉब घोटाला सामने आय़ा था। आरोप के अनुसार, ग्रुप-डी में नियुक्ति देने के लिए उन्होंने जमीन ली थी। लालू यादव ने बिना किसी विज्ञापन के ये नौकरियां दी थी। ईडी की मानें तो लालू परिवार को कुल 7 जगहों पर जमीन दी गई थी। साथ ही लालू परिवार पर 600 करोड़ रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग का भी आरोप लगा है। इस पूरे कथित घोटाले में लालू यादव के अलावा राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, मीसा भारती और हेमा यादव को आरोपी बनाया गया है।
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