
नई दिल्ली: दुनियाभर में मेढकों की संख्या दिन पर दिन कम होती जा रही है। जिसका सिधा-सिधा असर इंसानों पर पड़ रहा है। जहां एक तरफ कुछ लोगों का कहना है कि मेंढ़ की घटती हुई आबादी से इंसान पर क्या प्रभाव पड़ सकता है। वहीं दूसरी ओऱ कुछ का कहना है कि इंसान को स्वस्थ रहने के लिए मेंढ़कों का धरती पर रहना बेहद जरूरी है।इसके अलावा वैज्ञानिकों ने अपनी रिसर्च में यह साबित भी किया है। आज हम आपको बताने वाले है कि मेंढक इंसानों के लिए कितना जरूरी है।
बता दें कि एनवॉयर्नमेंट रिसर्च लेटर्स में इस बात का खुलासा किया गया है कि 80 के दशक में पनामा और कोस्टा रिका में पानी और जमीन दोनों पर रहने वाले उभयचर जीवों की संख्या में कमी आई। इनमें मेढ़क और सैलमेंडर भी शामिल है। इन सभी को वायरल फंगल इंफेक्शन हुआ था। इनकी संख्या तेजी से घट रही थी। शुरुआती दौर में वैज्ञानिक ठीक से रिसर्च भी नहीं कर पा रहे थे। वहीं इस मामले में वैज्ञानिकों का कहना है कि मेढ़क और सैलामैंडर्स मच्छरों की आबादी को बढ़ने से रोकने में मदद करते है। ये पानी में मौजूद मच्छरों के लार्वे को खाते है। जिसकी वजह से बीमारियां फैलने का खतरा कम बना रहाता है, जिनमें मलेरिया, चिकनगुनिया औऱ डेंगू को रोकने का काम करते है। दरअसल, कोस्टा रिका और पनामा में फंगल का असर बढ़ने के कारण मेढ़कों की मौत का आंकड़ा बढ़ गया है।
वहीं पिछले 50 सालों का इतिहास देखे तो वहां इंसानों में मच्छरों से होने वाली बीमारी के मामले बढ़े है। पहले औसतन एक हजार लोगों में 1.5 लोगों को मलेरिया के मामले सामने आते थे जो बढ़कर 2 हो गए है। इतना ही नहीं, ऐसी घटनाओं के कारण मध्य अमेरिका में मलेरिया के मामलों में 70 से 90 फीसदी इजाफा हुआ है।
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