
नई दिल्ली: अमृतसर के जलियांवाला बाग के बारे में कौन नहीं जानता। देश की आजादी के इतिहास में इस बाग की दास्तान जितनी करुण है उतनी करुण और कोई नहीं। यहां एक गोरे अफसर के आदेश पर सैकड़ों भारतीयों को मौत के घाट उतार दिया गया था। आधुनिक इतिहास के सबसे नृशंस हत्याकांडों में शुमार 13अप्रैल 1919का दिन हमेशा याद रहेगा। बैसाखी के दिन हजारों लोग रोलेट एक्ट और राष्ट्रवादी नेताओं सत्यपाल एवं डॉ. सैफुद्दीन किचलू की गिरफ्तारी के विरोध में जलियांवाला बाग में एकत्र हुए थे तथा जनरल रेजीनल्ड डायर ने पंजाब के तत्कालीन गवर्नर माइकल ओड्वायर के आदेश पर अंधाधुंध गोलीबारी कर इनमें से सैकड़ों को मौत की नींद सुला दिया था।
जलियावांला बाग की सभा हिन्दू-मुस्लिम एकता की भी प्रतीक थी। सभा में भाग लेने मुंबई से अमृतसर आ रहे महात्मा गांधी को पलवल के रेलवे स्टेशन पर गिरफ्तार कर लिया गया, लेकिन सभा को रोक पाने में असफल रहने पर पंजाब के गवर्नर माइकल ओड्वायर ने जनरल डायर से कहा कि वे भारतीयों को सबक सिखा दें। गवर्नर का आदेश पाकर डायर ने अपने सैनिकों के साथ जलियांवाला बाग को घेर लिया और वहां मौजूद लोगों पर अंधाधुंध गोलीबारी की। उनके अनुसार लोगों को भागने का मौका भी नहीं मिल पाया, क्योंकि बाग तीन ओर से ऊंची-ऊंची दीवारों से घिरा था और इसमें प्रवेश तथा निकास का एक ही छोटा-सा रास्ता था। डायर के कारिंदों की बंदूकें तब तक गरजती रहीं, जब तक कि गोलियां खत्म नहीं हो गईं।
इस घटना में सैकड़ों लोग मारे गए, लेकिन इसका सही-सही आंकड़ा कभी सामने नहीं आ पाया. कांग्रेस की उस समय की रिपोर्ट के मुताबिक इस घटना में कम से कम 1,000लोग मारे गए और 2,000 के करीब घायल हुए। सरकारी आंकड़ों में मरने वालों की संख्या 379बताई गई, लेकिन पं. मदनमोहन मालवीय के अनुसार इस नृशंस कत्लेआम में 1,300 लोग मारे गए थे। स्वामी श्रद्धानंद ने मरने वालों की संख्या 1,500से अधिक बताई थी। अमृतसर के तत्कालीन सिविल सर्जन डॉ. स्मिथ के अनुसार भी इस घटना में 1,500 से अधिक लोग मारे गए। पार्क में लगी पट्टिका पर लिखा है कि लोगों ने अपनी जान बचाने के लिए बाग में स्थित कुएं में छलांग लगा दी। अकेले इस कुएं से ही 120शव बरामद हुए थे।
ब्रिटिश साम्राज्य के लिए पंजाब बहुत संवेदनशील था। वह बोले कि जलियांवाला बाग हत्याकांड अचानक घटी घटना नहीं थी बल्कि यह ब्रिटिश राज द्वारा किए जा रहे जुल्मों का हिस्सा थी। कूका लहर के समय 1982में इस लहर के नेताओं को पंजाब में तोपों के आगे बांध कर उड़ा देने के साथ शहीद किया गया था। प्रो. सुखदेव सिंह सोहल ने उस समय की भारतीय सेना की बनावट, ब्रिगेडियर-जनरल डायर के पद और जिम्मेदारी पर रोशनी डाली। 1857की घटनाओं संबंधी भी जानकारी सांझा की। बताया कि जनरल डायर और लेफ्टिनेंट गवर्नर सर माइकल ओडवाहर दोनों आयरलैंड से संबंधित थे और दोनों की सोच भी मिलती थी।
अमृतसर के डिप्टी कमिश्नर कार्यालय में 484शहीदों की सूची है, जबकि जलियांवाला बाग में कुल 388शहीदों की सूची है। ब्रिटिश राज के अभिलेख इस घटना में 200लोगों के घायल होने और 379लोगों के शहीद होने की बात स्वीकार करते है जिनमें से 337पुरुष, 41नाबालिग लड़के और एक 6-सप्ताह का बच्चा था।
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