Petrol Pump तो सुना, लेकिन Diesel Pump क्यों नहीं? जानें इस नाम के पीछे की दिलचस्प कहानी

Petrol Pump तो सुना, लेकिन Diesel Pump क्यों नहीं? जानें इस नाम के पीछे की दिलचस्प कहानी

Petrol Pump vs Diesel Pump: रोजाना लाखों लोग ईंधन भरवाने के लिए जाते हैं, लेकिन एक सवाल जो अक्सर दिमाग में आता है कि इसे 'पेट्रोल पंप' ही क्यों कहते हैं? जबकि यहां डीजल, CNG और कभी-कभी इंजन ऑयल भी उपलब्ध होता है। क्या कभी 'डीजल पंप' नाम सुना है? नहीं न! दरअसल, इस नाम के पीछे इतिहास, भाषा और व्यावहारिक कारण छिपे हैं, जो काफी दिलचस्प हैं। तो आइए जानते हैं कि क्यों यह नाम सदियों से चला आ रहा है और बदल क्यों नहीं रहा।

पेट्रोल पंप का इतिहास

बता दें, ईंधन स्टेशनों का इतिहास 19वीं सदी के अंत से जुड़ा है, जब ऑटोमोबाइल की शुरुआत हुई थी। उस समय मुख्य ईंधन पेट्रोल (जिसे अमेरिका में गैसोलीन कहते हैं) था। डीजल इंजन बाद में, 20वीं सदी की शुरुआत में लोकप्रिय हुए। भारत में ब्रिटिश काल से ईंधन स्टेशन स्थापित होने लगे और चूंकि शुरुआती वाहन पेट्रोल से चलते थे, इसलिए इन स्टेशनों को 'पेट्रोल पंप' नाम मिला। हालांकि समय के साथ डीजल वाहनों की संख्या बढ़ी, लेकिन नाम वही रह गया इसका एक कारण यह भी था कि पेट्रोल पंप का नाम पहले से ही लोगों की जुबान पर चढ़ चुका था।

विदेशों जैसे यूरोप और अमेरिका में इन्हें 'फ्यूल स्टेशन' या 'गैस स्टेशन' कहते हैं, लेकिन भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों में 'पेट्रोल पंप' या 'पेट्रोल बंक' का नाम दिया गया। यह नाम इतना सामान्य हो गया कि अब यहां डीजल भरवाते समय भी हम 'पेट्रोल पंप' ही कहते हैं।

पेट्रोलियम से निकला पेट्रोल

इसके अलावा पेट्रोल पंप नाम के पीछे एक और बड़ा कारण है। दरअसल, पेट्रोल, डीजल, केरोसिन और सीएनजी सब कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) से निकाले जाते हैं, जिसे 'पेट्रोलियम' कहते हैं। 'पेट्रोल' शब्द इसी 'पेट्रोलियम' से आया है। इसलिए, ईंधन स्टेशनों को 'पेट्रोल पंप' कहना सभी पेट्रोलियम उत्पादों को कवर करता है। अगर इसे 'डीजल पंप' कहते, तो यह सीमित लगता, जबकि पेट्रोल पंप नाम व्यापक है।

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