
National Census: मोदी सरकार ने दशकीय जनगणना की तैयारी शुरू कर दी है।भारत में हर दस साल में जनगणना कराई जाती है, और 2021में होने वाली जनगणना अब जल्द ही आयोजित की जाएगी। पहले जनगणना का पहला चरण 1अप्रैल 2020से शुरू होना था, लेकिन कोरोना महामारी के चलते इसे स्थगित कर दिया गया था।
बता दें कि,जनगणना की प्रक्रिया इस समय सरकार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि कई नए कानून और अधिनियम इसी पर आधारित हैं। इनमें महिला आरक्षण अधिनियम भी शामिल है, जिसे पिछले साल संसद ने पारित किया था। इस अधिनियम के अनुसार, लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित की जाएंगी। यह प्रक्रिया जनगणना के आधार पर परिसीमन के बाद शुरू होगी।
इस बार पूरी तरह से डिजिटल होगी जनगणना
वर्तमान में, सरकारी एजेंसियां 2011की जनगणना के आंकड़ों पर निर्भर हैं और इन्हीं आंकड़ों के आधार पर नीतियां बनाई जा रही हैं और सब्सिडी आवंटित की जा रही है। जनगणना के अंतर्गत घरों को सूचीबद्ध करने और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) को अद्यतन करने का कार्य 1अप्रैल से 30सितंबर 2020तक होना था, लेकिन कोरोना महामारी के कारण इसे स्थगित कर दिया गया था।
अब अधिकारियों का कहना है कि पूरी जनगणना और NPR प्रक्रिया पर सरकार के 12,000करोड़ रुपये से अधिक खर्च हो सकते हैं। इस बार जनगणना पूरी तरह से डिजिटल होगी, जिसमें आधार या मोबाइल नंबर को अनिवार्य रूप से एकत्र किया जाएगा। इसके साथ ही, जनगणना के दौरान NPR का काम भी पूरा किया जाएगा, लेकिन इस बार जाति संबंधी कॉलम को शामिल करने पर कोई फैसला नहीं लिया गया है।
'वन नेशन, वन इलेक्शन' की नीति पर भी काम जारी
प्रधानमंत्री मोदी की नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार 'वन नेशन, वन इलेक्शन' की नीति को अपने मौजूदा कार्यकाल में लागू करने के लिए तैयार है। सरकार इस नीति के प्रति आशावादी है और इसके लिए प्रयासरत है। पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद की अध्यक्षता में एक पैनल ने इस साल की शुरुआत में रिपोर्ट प्रस्तुत की थी, जिसमें लोकसभा और विधानसभा चुनावों को एक साथ कराने का समर्थन किया गया था। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को प्रस्तुत की गई इस रिपोर्ट ने 'वन नेशन, वन इलेक्शन' की प्रक्रिया को तेजी दी है।
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