
DGMO In India-Pakistan Ceasefire: भारत-पाकिस्तान के बीच 10 मई को सीजफायर समझौता लागू हो चुका है। यह फैसला भारत और पाकिस्तान के DGMO (डायरेक्टर जनरल मिलिट्री ऑपरेशन्स) के बीच हुई बातचीत के बाद लिया गया। बता दें, भारतीय सेना में DGMO का पद न केवल अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रतिष्ठित है। बल्कि इसे हासिल करने की प्रक्रिया भी बेहद कठिन और चुनौतीपूर्ण है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि भारतीय सेना में DGMO बनने की चयन प्रक्रिया क्या है? सेना में उनकी भूमिका, उनकी जिम्मेदारियों और सैलरी क्या है?
DGMO कौन होता है?
DGMO यानी डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशन्स, भारतीय सेना का एक वरिष्ठ लेफ्टिनेंट जनरल (3-स्टार रैंक) होता है। जो सेना मुख्यालय में कार्य करता है और सीधे सेना प्रमुख (Chief of Army Staff) को रिपोर्ट करता है। यह अधिकारी सेना के सभी सैन्य अभियानों की योजना, निगरानी, और संचालन के लिए जिम्मेदार होता है। इसके अलावा DGMO की भूमिका युद्ध, आतंकवाद विरोधी अभियानों, शांति मिशन और सीमा पर तनाव को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण होती है।
DGMO की मुख्य जिम्मेदारियां
DGMO का पद भारतीय सेना में रणनीतिक और परिचालन स्तर पर अहम भूमिका निभाता है। ऐसे में उन्हें सैन्य अभियानों की योजना तैयार करनी होती है। साथ ही, तीनों सेना यानी थलसेना, नौसेना, और वायुसेना के बीच तालमेल बनाना होता है। इसके अलावा सीमा पर तनाव प्रबंधन को कम करने के लिए अन्य देशों के DGMOs से हॉटलाइन पर बातचीत करना, रक्षा मंत्रालय और सरकार को राष्ट्रीय सुरक्षा और सैन्य रणनीति पर सलाह देना और खुफिया जानकारियों का प्रबंधन करना शामिल हैं।
DGMO बनने की चयन प्रक्रिया
बता दें, DGMO बनना कोई आसान उपलब्धि नहीं है। यह पद केवल उन लेफ्टिनेंट जनरल रैंक के अधिकारियों को दिया जाता है, जिनके पास वर्षों का अनुभव और रणनीतिक दृष्टिकोण हो। इन अधिकारियों को राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) या कंबाइंड डिफेंस सर्विसेज (CDS) के माध्यम से सेना में कमीशन प्राप्त करना होता है। जिसके बाद भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) या ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी (OTA) से औऱ नेशनल डिफेंस कॉलेज (NDC) से रणनीतिक और रक्षा अध्ययन में उच्च ट्रेनिंग पूरा करना जरूरी है।
कितनी होती है DGMO की सैलरी?
DGMO के एक लेफ्टिनेंट जनरल रैंक का अधिकारी को 7वें वेतन आयोग के अनुसार ₹1,82,200 से ₹2,24,100 प्रति माह सैलरी मिलती है। इसके अलावा उन्हें फील्ड एरिया अलाउंस, और अन्य सैन्य भत्ते भी मिलते हैं। इसके साथ DGMO के अधिकारी को कैंटोनमेंट क्षेत्र में सरकारी आवास, मेडिकल सुविधाएं, सरकारी वाहन, पेंशन और अन्य रिटायरमेंट लाभ मिले हैं।
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