कश्मीर को लेकर भारत का सख्त रुख, मध्यस्थता प्रस्ताव ठुकराकर कहा - PoK पर फोकस

कश्मीर को लेकर भारत का सख्त रुख, मध्यस्थता प्रस्ताव ठुकराकर कहा - PoK पर फोकस

India On Kashmir: भारत-पाकिस्तान के बीच 10 मई को सीजफायर समझौता लागू हो चुका है। लेकिन इस बीच, एक बार फिर से कश्मीर मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता की पेशकश का मुद्दा सुर्खियां बटोर रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा कश्मीर पर मध्यस्थता की पेशकश के जवाब में भारत ने अपना रुख साफ करते हुए इसे स्पष्ट रूप से ठुकरा दिया। वहीं, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज  शरीफ ने अमेरिका के इस ऑफर का स्वागत किया।

बता दें, अमेरिकी राष्ट्रपति के इस ऑफर भारत ने साफ तौर पर कहा कि कश्मीर पर अब केवल एक ही मुद्दा बाकी है और वो है पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) की वापसी। इसके अलावा भारत का पाकिस्तान के साथ किसी अन्य विषय पर बातचीत का कोई इरादा नहीं है।

ट्रंप का मध्यस्थता प्रस्ताव

बता दें, 10 मई को भारत-पाकिस्तान सीजफायर की घोषणा के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट किया। उन्होंने दावा किया कि यह समझौता अमेरिका की मध्यस्थता का नतीजा था। ट्रंप ने आगे कहा 'मैं दोनों देशों के साथ मिलकर काम करूंगा, ताकि 'हजार साल पुराने' कश्मीर मुद्दे का समाधान निकाला जा सके।'

ट्रंप के मध्यस्थता प्रस्ताव पर भारत का जवाब

वहीं, भारत ने ट्रंप के इस प्रस्ताव को तुरंत खारिज कर दिया। भारत अब सिर्फ पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) की वापसी चाहता है। इसके अलावा कोई बातचीत नहीं होगी। भारत का कहना है कि हम किसी भी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता नहीं चाहते।' भारत ने कश्मीर को लेकर अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है। इसलिए यह मुद्दा पूरी तरह भारत का आंतरिक मामला है।

ट्रंप के मध्यस्थता प्रस्ताव पर पाकिस्तान का जवाब

दूसरी तरफ, पाकिस्तान ने ट्रंप की मध्यस्थता की पेशकश का स्वागत किया। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अमेरिका, सऊदी अरब, और चीन को सीजफायर के लिए मध्यस्थता का श्रेय दिया। उन्होंने कहा 'हम क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए इस समझौते को स्वीकार करते हैं।' वहीं, पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि भारत के साथ कश्मीर, आतंकवाद, और सिंधु जल संधि जैसे मुद्दों पर बातचीत की जा सकती है।  

Leave a comment