पाकिस्तान की दोहरी नीति उजागर
पाकिस्तान लंबे समय से आतंकवाद को समर्थन देने के आरोपों का सामना करता रहा है। हाल ही में एक वायरल वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट में शहबाज शरीफ के एक मंत्री को आतंकियों के साथ मंच साझा करते हुए देखा गया। इस घटना ने भारत-पाक सीमा पर हाल के तनावों को और हवा दी है। खासकर मई 2025 में हुई चार दिनों की हिंसक झड़पों के बाद, जिसे ऑपरेशन सिंदूर के नाम से जाना गया। भारत ने इस दौरान अपनी स्वदेशी वायु रक्षा प्रणाली ‘आकाशतीर’ के जरिए पाकिस्तानी हमलों को नाकाम किया था।
आतंकियों के साथ मंच साझा करने का विवाद
सोशल मीडिया पर वायरल हुई तस्वीरों और वीडियो में शहबाज शरीफ के मंत्री को आतंकियों की प्रशंसा करते हुए देखा गया। इस घटना ने भारत में व्यापक आक्रोश पैदा किया है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि यह पाकिस्तान की आतंकवाद के प्रति नीति का स्पष्ट प्रमाण है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना भारत-पाक संबंधों में और तनाव बढ़ा सकती है। खासकर तब जब दोनों देश संघर्ष विराम पर सहमत हुए हैं।
भारत की प्रतिक्रिया और वैश्विक चिंता
भारत ने इस घटना को संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाने की योजना बनाई है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने हाल ही में कहा था कि भारत-पाक संघर्ष में विश्व समुदाय की भूमिका सीमित है और भारत अपनी सैन्य ताकत के बल पर अपनी सीमाओं की रक्षा करने में सक्षम है। इस बीच, वैश्विक जानकारों ने चेतावनी कि पाकिस्तान की ऐसी गतिविधियां क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा हैं और इससे परमाणु युद्ध का जोखिम भी बढ़ सकता है।
पाकिस्तान की आंतरिक स्थिति
पाकिस्तान के हालात भी इस घटना से प्रभावित हो सकते हैं। हाल ही में शहबाज शरीफ कैबिनेट ने सेना प्रमुख आसिम मुनीर को फील्ड मार्शल के पद पर पदोन्नत किया। जिसे भारत के खिलाफ ‘ऑपरेशन बुनियाल-अल-मरसूस’ में उनकी रणनीति का इनाम माना जा रहा है। यह घटना भारत-पाक संबंधों में एक नया मोड़ ला सकती है। भारत ने स्पष्ट किया है कि वह आतंकवाद के खिलाफ अपनी जीरो टॉलरेंस नीति पर कायम रहेगा।
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