
Pahalgam Terror Attack: राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को पहलगाम आतंकी हमले की जांच के दौरान एक बड़ा सुराग मिला है। जांच में सामने आया है कि इस हमले में अल उमर मुजाहिदीन के सरगना मुश्ताक अहमद जरगर की भूमिका हो सकती है। सूत्रों के अनुसार, जरगर के समर्थकों ने हमले में शामिल ओवर ग्राउंड वर्कर्स (OGW) की मदद की थी।
जांच में सामने आया है कि मुश्ताक अहमद जरगर आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का ऑपरेशनल कमांडर है। वह 2019के पुलवामा हमले में भी आरोपी रह चुका है। 1999के कंधार हाईजैक केस में जरगर को मौलाना मसूद अजहर के साथ छोड़ दिया गया था। फिलहाल वह पाकिस्तान में रह रहा है, लेकिन उसका श्रीनगर और आसपास के ओवर ग्राउंड नेटवर्क पर मजबूत असर बताया जा रहा है।
NIA को यह अहम जानकारी पहले से गिरफ्तार OGW की पूछताछ में मिली है। इसी वजह से जरगर की भूमिका की गहराई से जांच की जा रही है।
2023में NIA ने जरगर की संपत्ति की थी कुर्की
भारत सरकार ने जरगर के आतंकी संगठन को पहले ही प्रतिबंधित कर दिया था। 2023में NIA ने उसकी श्रीनगर स्थित संपत्ति को कुर्क भी कर दिया था। जानकारी के मुताबिक, जरगर अब भी पाकिस्तान में है, लेकिन वह अपने समर्थकों के जरिए जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को अंजाम दे रहा है।
22अप्रैल को हुआ था पहलगाम हमला, 26की गई थी जान
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22अप्रैल 2024को हुए आतंकी हमले में 26लोगों की जान चली गई थी। मरने वालों में कई पर्यटक शामिल थे। इस हमले के बाद भारत सरकार ने पाकिस्तान के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए सिंधु जल समझौते को सस्पेंड कर दिया था और पाकिस्तानी नागरिकों को जारी वीजा भी रद्द कर दिया था। इसके साथ ही पाकिस्तान से सभी व्यापारिक रिश्ते खत्म कर दिए गए।
क्या था कंधार हाईजैक मामला?
साल 1999में इंडियन एयरलाइन्स का एक विमान नेपाल के काठमांडू से हाईजैक कर लिया गया था। आतंकियों ने प्लेन को अमृतसर, लाहौर और फिर अफगानिस्तान के कंधार ले जाकर एक हफ्ते तक बंधक बनाए रखा। विमान में 178यात्री सवार थे। बदले में आतंकियों ने तीन कुख्यात आतंकियों — मौलाना मसूद अजहर, मुश्ताक अहमद जरगर और अहमद उमर सईद शेख की रिहाई की मांग की।
तत्कालीन अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने यात्रियों की जान बचाने के लिए उनकी रिहाई का फैसला किया। बाद में मसूद अजहर ने पाकिस्तान लौटकर जैश-ए-मोहम्मद की नींव रखी।
Leave a comment