
Why Made Five Districts In Ladakh: केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में मोदी सरकार ने हाल ही में 5नए जिलों की घोषणा की है। यह फैसला लद्दाख में चल रहे विरोध प्रदर्शनों और जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव के बीच लिया गया है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने खुद इस ऐतिहासिक फैसले की जानकारी दी। इन नए 5 जिलों के नाम होंगे: जास्कर, द्रास, शाम, नुब्रा, और चांगथांग।
लद्दाख में नए जिलों की आवश्यकता क्यों?
प्रशासनिक सुधार
लद्दाख में प्रशासनिक शक्तियों का विभाजन लंबे समय से मुद्दा बना हुआ था। स्थानीय लोग शिकायत कर रहे थे कि प्रशासनिक दिक्कतों के चलते उनकी जिंदगी मुश्किल हो रही है। इस संदर्भ में, लद्दाख में आंदोलन भी हो रहे हैं, जहां लोग सत्ता का विकेंद्रीकरण चाहते हैं। वर्तमान में, लद्दाख में केवल दो जिले - लेह और कारगिल हैं। पांच नए जिलों की घोषणा से प्रशासनिक कामकाज को गांव-गांव तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है। पूर्व बीजेपी सांसद जयमांग नमगयाल ने इसे ऐतिहासिक कदम बताया और कहा कि यह गांवों में लोगों की प्रशासनिक पहुंच को आसान बनाएगा।
जनजातीय अधिकारों को बढ़ावा
लद्दाख में जनजातीय समूह अपने जल, जंगल और जमीन के अधिकारों की रक्षा के लिए संविधान के शेड्यूल-6के तहत स्वायत्त जिला परिषद की मांग कर रहे हैं। संविधान के अनुच्छेद 244और 251के तहत ये परिषदें जनजातीय समुदाय के उत्थान और उनके अधिकारों की रक्षा करती हैं। वर्तमान में, लद्दाख में केवल दो जिले होने के कारण स्वायत्त परिषद की स्थापना मुश्किल थी, लेकिन पांच नए जिलों की घोषणा के बाद यह संभावना बढ़ गई है।
जम्मू-कश्मीर को संकेत
केंद्र सरकार की यह घोषणा जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव के बीच में आई है, जिससे इसे जम्मू-कश्मीर के संदर्भ में एक संकेत के रूप में देखा जा रहा है। जम्मू-कश्मीर में पूर्ण राज्य का मुद्दा गर्म है और केंद्र ने चुनाव के बाद इस पर फैसला करने का वादा किया है। लद्दाख में पांच जिलों की घोषणा के जरिए, केंद्र ने यह संकेत देने की कोशिश की है कि वह अपनी वादों को पूरा करने के लिए गंभीर है।
लद्दाख में प्रदर्शन और मांगें
लद्दाख में स्थानीय लोग लंबे समय से चार प्रमुख मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं:
1- राज्य का दर्जा
स्थानीय लोगों का कहना है कि केंद्र शासित प्रदेश होने के कारण उनकी राजनीतिक और प्रशासनिक हिस्सेदारी कम हो गई है।
2- संविधान के छठे शेड्यूल में शामिल करना
इस शेड्यूल के तहत जनजातीय क्षेत्रों को अधिक स्वायत्तता मिलती है।
3- विकास कार्यों के ठेकेदारी में स्थानीय भागीदारी
स्थानीय निवासियों का मानना है कि विकास कार्यों के ठेके स्थानीय लोगों को मिलना चाहिए।
4- शक्ति विभाजन
स्थानीय लोग शक्ति का विभाजन चाहते हैं ताकि प्रशासनिक निर्णय उनके हित में हों।
मार्च 2024में केंद्र सरकार ने इन मांगों पर प्रतिनिधियों के साथ बैठक की थी, लेकिन कोई ठोस निर्णय नहीं हो पाया। इसके परिणामस्वरूप, लोकसभा चुनाव में बीजेपी को लद्दाख में तीसरे स्थान पर रहना पड़ा, जबकि 2014और 2019में पार्टी को वहां जीत मिली थी।
अब देखना यह होगा कि पांच नए जिलों की घोषणा से लद्दाख में प्रशासनिक और राजनीतिक सुधार में कितना बदलाव आता है।
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