
Bajrang Punia: हरियाणा में विधानसभा चुनावों की धूम मची हुई है, और राजनीतिक दल अपनी-अपनी रणनीतियों के साथ मैदान में उतरे हैं। इस बीच, कांग्रेस पार्टी की रणनीति पर चर्चा का विषय बनी है पहलवान बजरंग पूनिया की हालिया नियुक्ति। कांग्रेस ने उन्हें अपने 114साल पुराने किसान सेल का को-चेयरमैन या कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया है। यह पद संगठन में दूसरा सबसे बड़ा पद है, और इस नियुक्ति ने पार्टी के भीतर नई हलचल मचा दी है।
कांग्रेस किसान सेल की भूमिका
कांग्रेस पार्टी अपने भीतर विभिन्न फ्रंटल संगठनों के माध्यम से अपनी विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास करती है। किसान सेल भी इसी तरह का एक संगठन है, जिसका मुख्य उद्देश्य किसानों से जुड़े मुद्दों को उठाना और पार्टी को इन मुद्दों पर सुझाव देना है। फ्रंटल संगठनों का मुख्य कार्य मुख्य संगठन के चुनावी कार्यों के दौरान आने वाली जानकारी की कमी को पूरा करना है। किसान सेल किसानों की समस्याओं और उनकी मांगों को पार्टी के सामने पेश करता है।
किसान सेल की स्थापना और इतिहास
कांग्रेस किसान सेल की स्थापना 1910में हुई थी, और इसे स्थापित करने में सईद अब्दुल अजीज का महत्वपूर्ण योगदान था। इस संगठन का मुख्य उद्देश्य किसानों को कांग्रेस की विचारधारा से जोड़ना था। 1936तक यह संगठन किसानों के बीच काफी लोकप्रिय रहा, लेकिन अखिल भारतीय किसान सभा के गठन के बाद इसकी लोकप्रियता में कमी आई। आजादी के बाद भी यह संगठन एक प्रमुख फ्रंटल संगठन के रूप में कार्य करता रहा है। वर्तमान में, किसान सेल के हर राज्य और जिले में अपनी कार्यकारिणी है, और पंजाब विधानसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष सुखपाल सिंह खैरा इसके चेयरमैन हैं।
किसान सेल से जुड़े प्रमुख नेता
किसान सेल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले कई नेता बाद में कांग्रेस और सरकार में महत्वपूर्ण पदों पर पहुंचे। इनमें सरदार हुकुम सिंह, बलराम जाखड़, राजेश पायलट, और नाना पटोले का नाम प्रमुख है। हुकुम सिंह ने राजस्थान और संयुक्त पंजाब में किसान कांग्रेस के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बलराम जाखड़ और राजेश पायलट ने इस संगठन से जुड़कर केंद्रीय मंत्री और लोकसभा स्पीकर जैसे प्रमुख पदों पर पहुंचे। नाना पटोले ने भी किसान सेल के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया और बाद में महाराष्ट्र कांग्रेस के अध्यक्ष बने।
बजरंग पूनिया की नियुक्ति के कारण
कांग्रेस ने बजरंग पूनिया को तुरंत बड़ा पद देने की बजाय किसान सेल में नियुक्त किया ताकि पार्टी में भीतर उठने वाले सवालों से बचा जा सके। पूनिया एक प्रसिद्ध चेहरा हैं, और उनकी उपस्थिति कांग्रेस को किसान समुदाय में बेहतर स्वीकार्यता दिला सकती है। उनके माध्यम से पार्टी किसानों के लिए घोषित 5गारंटियों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत कर सकती है।
वर्तमान में, किसान कांग्रेस के चेयरमैन सुखपाल खैरा पंजाब की राजनीति पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, जिससे अन्य हिस्सों में कांग्रेस की आवाज कमजोर पड़ रही थी। पूनिया की नियुक्ति से पार्टी इस कमी को पूरा करने की कोशिश कर रही है। हरियाणा में किसान मुद्दों पर उनकी सक्रियता और हालिया आंदोलनों में भागीदारी को देखते हुए, कांग्रेस ने उन्हें इस संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका सौंपी है।
इस नई नियुक्ति के साथ, कांग्रेस अपने किसान सेल को और मजबूत बनाने और आगामी चुनावों में किसानों के मुद्दों को प्रमुखता से उठाने की दिशा में कदम बढ़ा रही है।
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