75 सालों में कितना बदला भारत,जानें कुछ अहम बातें

75 सालों में कितना बदला भारत,जानें कुछ अहम बातें

नई दिल्ली: आजादी का मतलब भारत से ज्यादा बेहतर कौन समझ सकता है। कई सालों तक अंग्रेजों के गुलामी करने के बाद जब भारत को स्वतंत्रता मिली तो यह दिन इतिहास के पन्नों में सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया। वहीं इस आजादी को पाना इतना आसान नहीं था क्योंकि इस लड़ाई में भारत के कई वीर सपूतों,बेटियों ने अपनी जान तक देश के लिए न्यौछावर कर दी।

हालांकि 15 अगस्त 1947 को हमें आजादी तो मिली लेकिन सैकड़ों वर्षों की गुलामी की बेड़ियों ने देश को गरीबी और अव्यवस्था के दलदल में फंसा दिया था. तब से लेकर अब तक 75 साल की यात्रा में देश ने सांस्कृतिक, सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक, सैन्य, खेल और तकनीकी क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। बीते 75 सालों में अपनी अंदरूनी समस्याओं, चुनौतियों के बीच देश ने ऐसी उपलब्धियां हासिल की हैं जिनपर हमें गर्व है। ऐसा ही एक सेक्टर है स्वास्थ्य का,

आइए जानते हैं कि आजादी से लेकर अबतक देश के स्वास्थ्य क्षेत्र में क्या-क्या बदलाव आया है।

देश में स्वास्थ्य सुविधाएं ना के बराबर थीं। 1951 की जनसंख्या के मुताबिक देश के लोगों की लाइफ एक्सपेक्टेंसी यानी जीवन प्रत्याशा 32 साल थी जो 2022 में बढ़कर 70 साल पर पहुंच गई है। जन्म के समय शिशु मृत्यु दर प्रति 1 हजार पर 145 थी जो 2022 में घटकर 27 रह गई है। पिछले 75 वर्षों में स्वास्थ्य सेक्टर में काफी काम हुआ है और इसका असर भी दिख रहा है। वही अब बात करे डॉक्टर्स की तो देश में आजादी के समय केवल 50 हजार डॉक्टर थे जिनकी संख्या आज बढ़कर करीब 13 लाख 8 हजार हो चुकी है। इसके अलावा साल 1947 में देश में 30 मेडिकल कॉलेज ही थे,लेकिन अब 600 से ज्यादा मेडिकल कॉलेज है। इतना ही नहीं, आजादी के समय देशभर में 2,014 सरकारी अस्पताल थे जिनकी संख्या आज साढ़े 23 हजार से ज्यादा है। उस वक्त देश में प्राइमरी हेल्थ केयर सेंटर्स की संख्या सिर्फ 725 थी जो आज बढ़कर 23,391 हो गई।

आजादी से अब तक यानी 75 सालों में हमारे देश के हेल्थ इनफ्रास्ट्राक्चर में अच्छी खासी बढ़ोतरी हुई है। मेडिसिन के सेक्टर में भी भारत की 75 साल की यात्रा लाजवाब रही है। साल 1947 में भारत का फार्मा मार्केट विदेशी कंपनियों के कब्जे में था औऱ उस वक्त जरूरत की 80-90 परसेंच दवाइयां इंपोर्ट होती थी। भारत में दवाइयों के दाम बाकी देशों के मुकाबले काफी ज्यादा थे और ये स्थिति 1960 तक रही।भारत ने जब दवाइयों के घरेलू प्रोडक्शन पर फोकस बढ़ाया तो स्थिति तेजी से बदली।

किसी भी देश की आर्थिक हालत कैसी है इस सवाल का पता देश की जीडीपी यानी की ग्रॉस डेमोस्टक प्रोडक्ट से लगाया जाता है। बता दें कि जब अंग्रेजे भारत आए थे तब हमारे देश की जीडीपी 22 प्रतिक्षत थी लेकिन आजादी के बाद यह घटकर केवल 3 प्रतिक्षत हो गई थी।लेकिन साल 1947 से लेकर आज तक हमारी जीडीपी में 50 प्रतिक्षत से भी ज्यादा बढ़ी है। दरअसल,साल 1950 से लेकर 51 तक जीडीपी का आंकड़ा 2.93 लाख करोड़ रूपये था,जो कि साल 2020 से 2021 में 134 लाख करोड़ से ज्यादा होने का अनुमान है।

वहीं अब बात करें तकनीकि क्षेत्र की तो इस क्षेत्र में भारत को साल 1995 में बड़ी उरलब्धि मिली थी।जब पहली बार देश में मोबाइल फोन आया था। वही भारत में सबसे पहली मोबाइल कॉल करीब ढाई दशक पहले 31 जुलाई 1995 को हुई थी। देश में पहली मोबाइल कॉल किसी और ने नही बल्कि पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ज्योति बसु केंद्रीय दूरसंचार मंत्री सुखराम ने की थी।

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