Air Defence:भारत की हवाई रक्षा ढाल: पाकिस्तान के हमलों को कैसे किया नाकाम, कितने सालों में बनी यह ताकत?

Air Defence:भारत की हवाई रक्षा ढाल: पाकिस्तान के हमलों को कैसे किया नाकाम, कितने सालों में बनी यह ताकत?

Air Defence:भारत की वायु रक्षा प्रणाली ने ऑपरेशन सिंदूर के तहद पाकिस्तान के आक्रामक हमलों को नाकाम कर अपनी तकनीकी ताकत और रणनीतिक ताकत का परिचय बखूबी दे दिया है। 7-8 मई 2025 को पाकिस्तान ने भारत के कुछ शहरों पर ड्रोन, मिसाइल और फाइटर जेट्स (JF-17, F-16) के जरिए हमला करने की कोशिश की, लेकिन भारत के  हवाई रक्षा सैन ने इन सभी प्रयासों को नाकाम साबित कर दिया। इस सफलता के पीछे पिछले एक दशक से अधिक समय में विकसित मजबूत रक्षा प्रणालियों का अहम भूमिका है।
 
ऑपरेशन सिंदूर से बौखलाया पाक
पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर, पंजाब और गुजरात के शहरों, जैसे श्रीनगर, अमृतसर, पठानकोट और भुज, को निशाना बनाया था। जिसका भारतीय सेना ने S-400, आकाश मिसाइल, बराक-8, और DRDO की एंटी-ड्रोन तकनीक के साथ 300 से अधिक ड्रोनों और 10 मिसाइलों को हवा में ही बुरी तरह से नष्ट कर दिया। ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारत ने जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तान के लाहौर, रावलपिंडी और कराची में सैन्य ठिकानों, और नूर खान एयरबेस को निशाना बनाया, जिससे पाकिस्तान को भारी नुकसान हुआ। इतना ही नही भारतीय सेना ने पाकिस्तान के तीन फाइटर जेट्स को भी मार गिराया, जिसने उसकी हवाई निगरानी क्षमता को कमजोर कर दिया।
 
(Air Defense) की ताकत
भारत की यह हवाई रक्षा ढाल (Air Defense) रातोंरात नहीं बनी। बल्कि 2014 से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर जोर दिया गया, और S-400 प्रणाली, जिसे रूस से 2018 में खरीदा गया जो 400 किमी तक के हवाई खतरों को नष्ट करने में सक्षम रहता है। स्वदेशी आकाश मिसाइल और DRDO की एंटी-ड्रोन तकनीक ने भी इस ढाल को मजबूत किया। 2017 में इजरायल के साथ बराक-8 मिसाइल के लिए 2.5 बिलियन डॉलर का सौदा हुआ, जो मध्यम दूरी के खतरों को रोकने का काम करता है। 2024 में मैन-पोर्टेबल काउंटर ड्रोन सिस्टम (MPCDS) की तैनाती ने ड्रोन हमलों के खिलाफ भारत की क्षमता को और ज्यादा बढ़ा दिया ।
 
पाकिस्तान को मुंह तोड़ जवाब दे भारत ने वैश्विक मंच पर अपनी स्थिति मजबूत बना लिआ है। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान की नागरिक विमानों को ढाल बनाने की रणनीति की निंदा की। भारत की यह ताकत न केवल सैन्य, बल्कि कूटनीतिक और तकनीकी क्षेत्र में भी उसकी बढ़ती हैसियत को दर्शाती है।

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