Haryana News: भारत सरकार की एकीकृत बागवानी विकास मिशन (MIDH) योजना का लाभ हरियाणा के सिरसा जिले के किसानों को लगातार मिल रहा है। इस योजना का उद्देश्य फल, सब्जियां, मसाले, फूल तथा अन्य बागवानी फसलों का उत्पादन बढ़ाना, किसानों की आय में वृद्धि करना, पोषण सुरक्षा को मजबूत बनाना तथा बागवानी फसलों की गुणवत्ता में सुधार लाना है। सिरसा जिले के विभिन्न गांवों के किसान अब किन्नू उत्पादन को अधिक बढ़ावा दे रहे हैं। किन्नू को GI (जियोग्राफिकल इंडिकेशन) टैग मिलने के बाद किसानों का रुझान इस फसल की ओर तेजी से बढ़ा है। पहले किसान सीमित क्षेत्र में इसकी खेती कर रहे थे, लेकिन अब लगातार नए बाग लगाए जा रहे हैं।
जिला बागवानी अधिकारी डॉ. दीन मोहम्मद ने बताया कि GI टैग मिलने से सिरसा का किन्नू राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना रहा है। उन्होंने कहा कि सिरसा अब किन्नू का हब बनता जा रहा है। विभाग किन्नू के साथ-साथ ऐसी बागवानी फसलों को भी बढ़ावा दे रहा है जिनमें पानी की आवश्यकता कम होती है, क्योंकि भूजल स्तर लगातार घट रहा है और सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं हो पाता। उन्होंने बताया कि इस वर्ष विभाग ने 125 हेक्टेयर में किन्नू, 70 हेक्टेयर में अमरूद लगाने का लक्ष्य रखा है। इसके अलावा बेर, अनार तथा बेल (बेलपत्र) जैसी कम पानी वाली फसलों को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। ट्रायल के तौर पर दो हेक्टेयर क्षेत्र में बेल की खेती का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। डॉ. दीन मोहम्मद ने बताया कि MIDH योजना के तहत केंद्र और हरियाणा सरकार दोनों किसानों को अनुदान देती हैं। किन्नू की खेती पर केंद्र सरकार ₹12,000 प्रति एकड़ तथा हरियाणा सरकार ₹31,000 प्रति एकड़ की सहायता प्रदान करती है। इस प्रकार किसानों को कुल ₹43,000 प्रति एकड़ का अनुदान मिलता है। वहीं बेर की खेती पर ₹34,000 प्रति एकड़ तथा अनार की खेती पर ₹48,000 प्रति एकड़ का अनुदान दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि अब तक लगभग 40 से 50 हेक्टेयर क्षेत्र में नए बाग लगाए जा चुके हैं। इस वर्ष सभी बागवानी फसलों के लिए 227 हेक्टेयर का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसे जल्द पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए किसानों को लगातार जागरूक भी किया जा रहा है।
गांव फतेहपुरिया नियामत खां के किसान महिंदर सिंह ने बताया कि उनके पास पहले से चार एकड़ में किन्नू और एक एकड़ में नींबू का बाग है। उन्हें सरकार से समय पर सभी प्रकार की सहायता और सब्सिडी मिली तथा किसी कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़े। आवश्यक दस्तावेज जमा करने के बाद उन्हें अनुदान राशि समय पर प्राप्त होती रही। उन्होंने बताया कि अब उन्होंने अपने बाग का विस्तार करते हुए 21 कनाल में नए किन्नू के पौधे लगाए हैं। उनका कहना है कि शुरुआत में कुछ चुनौतियां जरूर आती हैं, लेकिन बाद में अच्छी आय होने लगती है। पिछले तीन-चार वर्षों से उन्हें बागवानी से बेहतर आमदनी मिल रही है। उन्होंने अन्य किसानों से भी बागवानी अपनाने की अपील करते हुए कहा कि इससे पानी की बचत होती है और किसानों की आय भी बढ़ती है।
महेंद्र सिंह ने कहा कि सिरसा के किन्नू को GI टैग मिलने से इसकी गुणवत्ता को वैश्विक पहचान मिली है। इससे भविष्य में किसानों को बेहतर दाम मिलने की उम्मीद है और फसल की बिक्री भी अधिक आसान होगी।
एक अन्य किसान मदन लाल ने बताया कि बागवानी की खेती लाभकारी है। सरकार किसानों को पर्याप्त सहायता और अनुदान उपलब्ध करा रही है। उनका कहना है कि बागवानी से पानी की बचत होती है और किसानों की आय में भी वृद्धि होती है। उन्होंने किसानों से अधिक से अधिक बागवानी फसलों को अपनाने की अपील की।