Hockey Jersey Controversy: भारतीय हॉकी टीम की जर्सी का रंग नीले से बदलकर केसरिया करने पर मचे बवाल हॉकी इंडिया ने सफाई दी है। हॉकी इंडिया के प्रेसिडेंट दिलीप कुमार टिर्की ने कहा कि खिलाड़ियों, कोचों और सपोर्ट स्टाफ ने नीले हॉकी टर्फ पर ठीक से दिखाई न देने की समस्या के कारण यह बदलाव करने का सुझाव दिया था। बता दें कि जर्सी के रंग में इस बदलाव से विवाद खड़ा हो गया है। भारत के पूर्व कप्तान और ओलंपियन विरेन रासकिन्हा ने इस फैसले पर सवाल उठाए हैं और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी इस कदम की आलोचना की है।
न्यूज एजेंसी ANI से बात करते हुए टिर्की ने कहा कि नई जर्सी FIH पुरुष और महिला हॉकी वर्ल्ड कप से पहले लॉन्च की गई हैं। ये टूर्नामेंट 14 और 15 अगस्त को नीदरलैंड और बेल्जियम में शुरू होने वाले हैं। उन्होंने बताया क इस बार नारंगी रंग चुना गया है और हां, मैं मानता हूं कि कई सालों से टीम इंडिया नीले रंग की जर्सी पहनती रही है। हमने नीली जर्सी पहनकर कई टूर्नामेंट, कई अहम टूर्नामेंट खेले हैं। मैंने खुद भी नीली जर्सी पहनकर खेला है। लेकिन इस बार जो बदलाव किया गया है और ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है। मुझे लगता है कि 2014 में टीम ने पीली जर्सी पहनी थी और 2018 में हल्के नीले रंग का इस्तेमाल किया गया था। यह सुझाव सीधे हमारे कोचों, सपोर्ट स्टाफ, खिलाड़ियों और टीम कप्तानों की तरफ से आया था।
हॉकी इंडिया के प्रेसिडेंट ने कहा कि खिलाड़ियों और कोचों को लगा कि नीले टर्फ पर नीली जर्सी पहनने से मैच के दौरान ठीक से दिखाई देने में दिक्कत होती है। उन्होंने कहा, "उनका सुझाव था कि मैदान पर हॉकी टर्फ नीला है और खिलाड़ियों की प्लेइंग किट भी नीली थी। इसलिए, उस ओवरलैप की वजह से खेलते समय तकनीकी रूप से ठीक से दिखाई देने में दिक्कत हो रही थी। उन्हें कहीं न कहीं यह समस्या महसूस हो रही थी।
पीला और नारंगी रंग का मिला था सुझाव
टिर्की ने बताया कि दो रंगों का सुझाव दिया था पीला और नारंगी। इस बात पर ध्यान दिया गया कि नारंगी रंग भारतीय ध्वज के हमारे राष्ट्रीय रंगों में से एक है। इसलिए नारंगी रंग चुना गया और उसी के अनुसार डिज़ाइन तैयार किया गया। अगर टूर्नामेंट के बाद या भविष्य में खिलाड़ियों को कुछ और लगता है, तो हम किट के रंग को बेहतर बनाने पर फिर से काम कर सकते हैं।
भविष्य में जर्सी का रंग फिर से बदला जा सकता है या नहीं, इस पर टिर्की ने कहा कि हॉकी इंडिया खिलाड़ियों की पसंद पर विचार करेगा। उन्होंने कहा, "अगर वर्ल्ड कप के बाद या उसके दौरान, टीम या खिलाड़ियों को नारंगी रंग में सहज महसूस नहीं होता है जिसे उनकी अपनी मांग पर ही शुरू किया गया था - तो हम निश्चित रूप से भविष्य में इसे उस रंग में बदल सकते हैं जिसे टीम पसंद करती है।
खिलाडियों की पसंद के आधार पर लिया गया- टिर्की
टिर्की ने दोहराया कि यह फैसला मुख्य रूप से दिखने में आसानी (विज़िबिलिटी) और खिलाड़ियों की पसंद के आधार पर लिया गया था। उन्होंने कहा, "खिलाड़ियों और कोचों की ओर से एक खास मांग थी। नीले हॉकी टर्फ पर, नीली जर्सी पहनने से तेज़ खेल के दौरान देखने में दिक्कत होती थी, जिससे कंट्रास्ट और स्पष्टता कम हो जाती थी। दूसरी बात, नारंगी रंग हमारे राष्ट्रीय ध्वज में भी है। टीम द्वारा मांगे गए दो विकल्पों (नारंगी और पीला) में से नारंगी रंग को चुना गया।" टिर्की ने आगे कहा, "इस वर्ल्ड कप के लिए, नारंगी किट को मुख्य जर्सी और सफ़ेद को दूसरी किट के तौर पर तय किया गया है। अगर बाद में ज़रूरत पड़ी, तो हमेशा बदलाव किए जा सकते हैं।"
इस बीच, हॉकी इंडिया ने एक बयान जारी कर बताया कि राष्ट्रीय टीम की जर्सी का रंग बदलने का फैसला सपोर्ट स्टाफ़ और खिलाड़ियों की सिफारिशों और उनसे विस्तृत बातचीत के बाद लिया गया था। बयान में कहा गया, "हम आपको बताना चाहते हैं कि यूनिफ़ॉर्म का रंग बदलने का फैसला सपोर्ट स्टाफ़ और खिलाड़ियों की सिफारिशों और उनसे विस्तृत बातचीत के आधार पर लिया गया था। मुख्य विचार तकनीकी था। यह देखा गया कि नीली प्लेइंग यूनिफ़ॉर्म नीली सिंथेटिक प्लेइंग सतह के साथ मिल जाती थी, जो अब अंतरराष्ट्रीय हॉकी पिचों का मानक रंग है। इस दृश्य समानता से मैदान पर खिलाड़ियों के लिए स्पष्टता और दिखने की क्षमता प्रभावित होती थी।"