WEREWOLF SYNDROME: दुनिया की सबसे दुर्लभ बीमारी, नाक से लेकर पूरे चेहरे पर उग जाते हैं बाल! जानें कारण

WEREWOLF SYNDROME: दुनिया की सबसे दुर्लभ बीमारी, नाक से लेकर पूरे चेहरे पर उग जाते हैं बाल! जानें कारण

strange diseases: दुनियाभर में कई ऐसी बीमारियां हैं, जो काफी अजीबोगरीब हैं। इनमें से हाइपरट्रिचोसिस या वेयर वुल्फ सिंड्रोम नाम की एक बीमारी है। यह दुर्लभ बीमारी 20 लाख लोगों में से किसी एक में होती है। पूरी दुनिया में इस बीमारी के सिर्फ 50 मरीज अब तक पाए गए हैं। वही भारत के राज्य मध्य प्रदेश में 17 साल के युवक को भी ये अजीबोगरीब थी। उसके पूरे शरीर में अत्यधिक बाल उग गए है। तो चलिए आप आरको इसी बीमारी के बारे में बताते है।

क्या है हाइपरट्रिचोसिस बीमारी

हाइपरट्रिचोसिस एक त्वचा संबंधी बीमारी है जो त्वचा के अधिक बालों की वृद्धि के कारण होती है। यह एक अतिरिक्त रूप से उभरे हुए, भारी और काले रंग के बालों के रूप में दिखाई देते हैं। हाइपरट्रिचोसिस के कुछ लक्षणों में शामिल हैं: त्वचा पर अधिक बाल उगना, बाल उगने की दर में वृद्धि, त्वचा के लाल रंग के बनावट, त्वचा की खुजली और एक महसूसी अनुभव। हाइपरट्रिचोसिस का कारण त्वचा के अनुवंशिक स्वभाव या हार्मोनल असंतुलन हो सकता है।

इस बीमारी का इलाज अलग-अलग हो सकता है और इसमें शामिल चिकित्सा उपचार विवेचना के आधार पर किया जा सकता है। उपचार में लेजर या इलेक्ट्रोलिसिस जैसे तकनीकों का उपयोग किया जा सकता है जो अतिरिक्त बालों को हटाने में मदद करते हैं। अन्य उपचार में दवाओं का उपयोग किया जा सकता है जो बालों के वृद्धि को रोकते हैं।

                हाइपरट्रिचोसिस के लक्षण

•             त्वचा पर खुजली या जलन

•             त्वचा पर दाने या चकत्ते जो लाल हो सकते हैं

•             त्वचा का सूखापन या त्वचा का छिद्रों का विस्फोट

•             त्वचा पर बालों का उगना और नाखूनों का बड़ा होना

•             त्वचा के रंग का बदलना

•             त्वचा की बहुत अधिक तैलीयता या शुष्कता

•             त्वचा का फुलना या सूजन

यदि आपको लगता है कि आपके शरीर में ये लक्षण हैं तो आपको एक डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए, जिससे आपको इस समस्या के बारे में सही जानकारी और उपचार मिल सके।

हाइपरट्रिचोसिस का उपचार

हाइपरट्रिचोसिस का उपचार इसकी वजह और लक्षणों के आधार पर अलग-अलग हो सकता है। कुछ मुख्य उपचार विकल्पों में शामिल हो सकते हैं:

•दवाओं का उपयोग: दवाओं का उपयोग करके हाइपरट्रिचोसिस को नियंत्रित किया जा सकता है। इन दवाओं में एंटिहिस्टेमीन, ट्रांक्विलाइजर्स और बेंजोडियाजेपीन शामिल हो सकते हैं।

•प्रतिक्रिया नियंत्रण थैरेपी (एआरटी): एआरटी का उपयोग किया जाता है जो शरीर की एक प्रतिक्रिया होती है जिससे हाइपरट्रिचोसिस उत्पन्न होता है। यह थैरेपी बहुत ही उपयोगी होती है और इसमें एक विशेष विधि होती है जो डॉक्टर द्वारा निर्धारित की जाती है।

•चिकित्सा उपचार: हाइपरट्रिचोसिस के लिए दूसरे चिकित्सा उपचारों का भी उपयोग किया जाता है जैसे कि इंजेक्शन थेरेपी, फोटोथेरेपी, निरसन, लेजर उपचार, क्राइोथेरेपी आदि।

Leave a comment