Haryana News: संकल्प और अदम्य साहस की मिसाल पेश करते हुए 48 वर्षीय डॉ. आशा ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय पटल पर भारत का गौरव बढ़ाया है। यूरोप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एल्ब्रुस पर तिरंगा फहराने के महज कुछ ही दिनों के भीतर उन्होंने अफ्रीका के सर्वोच्च शिखर माउंट किलिमंजारो पर भी सफलतापूर्वक अपना परचम लहरा दिया। यात्रा और लॉजिस्टिक्स के समय को मिलाकर 8 दिनों के भीतर, प्रभावी रूप से मात्र 6 दिनों की अभियान अवधि में दोनों महाद्वीपों के शिखरों को छूकर उन्होंने यह ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम की।
आपको बता दें कि आशा रेवाड़ी पुलिस लाइन में रहती हैं। उनके पति अजय सिंह हरियाणा पुलिस में सब-इंस्पेक्टर के पद पर तैनात हैं। उनका परिवार भी समाज में उत्कृष्टता की मिसाल है उनकी बेटी एक डॉक्टर हैं और बेटा इंजीनियर है। डॉ. आशा पिछले 27 वर्षों से राजस्थान सरकार में नर्सिंग ऑफिसर के रूप में मरीजों की सेवा कर रही हैं। अपनी पूर्णकालिक सरकारी सेवा के साथ-साथ उन्होंने साहसिक खेलों में यह मुकाम हासिल किया है। पर्वतारोहण के अलावा वे एक कुशल एयर पिस्टल शूटर भी हैं। 10 मीटर, 25 मीटर और 50 मीटर स्पर्धाओं में भाग लेते हुए उन्होंने वर्ष 2025 के मास्टर्स महिला वर्ग में 4 स्वर्ण और 3 कांस्य पदक जीतकर अपनी बहुमुखी प्रतिभा साबित की।
डॉ. आशा ने 21 अगस्त की सुबह यूरोप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एल्ब्रुस पर सफलतापूर्वक कदम रखा। शिखर पर पहुंचकर उन्होंने न केवल भारतीय राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा लहराया, बल्कि “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” और “महिला सशक्तिकरण” के बैनर व लोगो प्रदर्शित कर दुनिया भर में भारतीय महिलाओं की क्षमता और सम्मान का संदेश प्रसारित किया। एल्ब्रुस फतह के तुरंत बाद वे तंजानिया के लिए रवाना हुईं और बिना रुके अपने दूसरे अभियान की शुरुआत की। 29 अगस्त की सुबह तड़के उन्होंने किलिमंजारो की मुख्य चोटी 'उहुरू पीक' पर विजय प्राप्त की। शून्य से नीचे के तापमान और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच एक के बाद एक दो महाद्वीपों के शिखरों को पार करना उनकी असाधारण शारीरिक सहनशक्ति और मानसिक दृढ़ता को दर्शाता है।