Haryana News: हरियाणा के रोहतक में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विक्रम कादयान ने खेलों के मामले में हरियाणा की कथित उपेक्षा पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि केंद्र और हरियाणा सरकार द्वारा प्रदेश की समृद्ध खेल संस्कृति और खिलाड़ियों की प्रतिभा के साथ न्याय नहीं किया जा रहा है। राष्ट्रमंडल खेल 2030 की मेजबानी गुजरात को दिए जाने के निर्णय ने हरियाणा के खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों को निराश किया है।
कादयान ने कहा कि रोहतक के सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने भी संसद और सार्वजनिक मंचों पर यह महत्वपूर्ण सवाल उठाया है कि जब अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में हरियाणा के खिलाड़ी देश के लिए बड़ी संख्या में पदक जीतते हैं, तो बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में हरियाणा को उसकी हिस्सेदारी क्यों नहीं मिलती। उन्होंने कहा कि हुड्डा ने हरियाणा को 2030 राष्ट्रमंडल खेलों में सह-मेजबान बनाने की मांग भी उठाई है। उन्होंने कहा कि 2026 राष्ट्रमंडल खेलों में भारत के 13 स्वर्ण पदकों में से 7 स्वर्ण हरियाणा के खिलाड़ियों ने जीते और हरियाणा के खिलाड़ियों ने कुल 11 पदक हासिल किए। हरियाणा सरकार के अनुसार, यह भारत के कुल पदकों का 28 प्रतिशत से अधिक है, जबकि प्रदेश की आबादी देश की आबादी का लगभग 2 प्रतिशत है।
हरियाणा को उसके योगदान के अनुरूप प्राथमिकता मिलनी चाहिए- विक्रम कादयान
कांग्रेस नेता विक्रम कादयान ने कहा कि जब हरियाणा के युवा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का तिरंगा सबसे ऊंचा कर रहे हैं, तो खेलों के लिए मिलने वाली सुविधाओं और केंद्रीय फंडिंग में भी हरियाणा को उसके योगदान के अनुरूप प्राथमिकता मिलनी चाहिए। आखिर हरियाणा ही क्यों नहीं, जहां के युवा लगातार देश के लिए पदक जीत रहे हैं? उन्होंने कहा कि सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने खेलो इंडिया के तहत हरियाणा को मिलने वाले आवंटन में असमानता का मुद्दा भी उठाया है। कादयान ने कहा कि पदक जीतने वाले खिलाड़ियों की संख्या और खेलों में प्रदेश के योगदान को देखते हुए हरियाणा को खेल सुविधाओं और खेल बजट में उचित एवं पर्याप्त हिस्सा मिलना चाहिए। उन्होंने अहमदाबाद में अंतरराष्ट्रीय स्तर की मुक्केबाजी सुविधाओं के विकास का उल्लेख करते हुए कहा कि भिवानी को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर की मुक्केबाजी अकादमी और अत्याधुनिक खेल सुविधाएं मिलनी चाहिए थीं। कप्तान हवा सिंह जैसे महान खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों ने भिवानी में मुक्केबाजी की मजबूत संस्कृति विकसित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसलिए भिवानी की खेल विरासत को ध्यान में रखते हुए यहां उच्चस्तरीय बॉक्सिंग इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाना चाहिए।
कादयान ने कहा कि झज्जर, रोहतक और सोनीपत कुश्ती तथा कबड्डी के प्रमुख केंद्र रहे हैं, लेकिन इन क्षेत्रों में इन खेलों से संबंधित अत्याधुनिक सुविधाओं के विस्तार की आवश्यकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, जरूरत केवल उन्हें बेहतर प्रशिक्षण, मैदान, उपकरण और सुविधाएं उपलब्ध कराने की है। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौरान खेलों और खिलाड़ियों को प्रोत्साहन देने के लिए गांव-गांव में स्टेडियम और खेल सुविधाओं के विकास पर जोर दिया गया था। उन्होंने कहा कि उस दौर में तैयार किए गए खेल ढांचे का रखरखाव और आधुनिकीकरण भी उतना ही जरूरी है, ताकि खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।
विक्रम कादयान ने कहा कि खिलाड़ियों को समय पर प्रोत्साहन राशि और आवश्यक सुविधाएं मिलना भी बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने सरकार से मांग की कि लंबित प्रोत्साहन राशि का समयबद्ध भुगतान किया जाए तथा खिलाड़ियों के लिए खेल छात्रावास, प्रशिक्षण केंद्र, आधुनिक मैदान और अंतरराष्ट्रीय स्तर की अकादमियों का विस्तार किया जाए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रमंडल खेलों जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजन की मेजबानी के लिए हरियाणा के पास मजबूत खेल आधार, प्रतिभाशाली खिलाड़ी और समृद्ध खेल संस्कृति मौजूद है। सरकार को भविष्य में ऐसे बड़े आयोजनों की मेजबानी के लिए हरियाणा को उचित अवसर देने की दिशा में प्रयास करना चाहिए।
कादयान ने कहा कि खेल केवल पदक जीतने तक सीमित नहीं हैं। खेलों के माध्यम से रोजगार, पर्यटन, स्थानीय अर्थव्यवस्था और युवाओं के विकास को भी गति मिल सकती है। हरियाणा को खेलों के साथ-साथ स्पोर्ट्स टूरिज्म का प्रमुख केंद्र बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों और खेलों के विकास के बिना विकसित भारत का सपना अधूरा रहेगा। हरियाणा जैसे खेल प्रतिभाओं से समृद्ध प्रदेश की उपेक्षा केवल खिलाड़ियों के साथ अन्याय नहीं, बल्कि देश की खेल क्षमता के साथ भी अन्याय है।